भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे पल दर्ज हैं, जो हमेशा याद किए जाते हैं। ऐसा ही एक यादगार क्षण तब आया, जब महान गायक किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने उन्हें रातोंरात बड़ी पहचान दिला दी। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार ने संगीत और अभिनय की विरासत अपने परिवार से पाई। उनके पिता हिंदी सिनेमा के दिग्गज पार्श्वगायक किशोर कुमार थे, जबकि उनकी मां प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री और 'कलकत्ता यूथ कॉयर' की संस्थापक रूमा गुहा ठाकुरता थीं। फिल्मी दुनिया से उनका रिश्ता और भी गहरा रहा, क्योंकि मधुबाला, योगिता बाली और लीना चंदावरकर उनकी सौतेली माताएं रहीं, वहीं अभिनेत्री काजोल उनके परिवार से जुड़ी हैं।
साल 1975 का एक दिलचस्प किस्सा आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय है। उस समय मुंबई के एक छोटे से म्यूजिक रूम में 23 वर्षीय अमित कुमार बेहद घबराए हुए खड़े थे। उनके सामने संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) बैठे थे और साथ में मन्ना डे तथा किशोर कुमार जैसे दिग्गज मौजूद थे। पंचम दा के कहने पर अमित ने संकोच के साथ एक गीत गाया। शायद उस समय उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि आने वाले वर्षों में वही आवाज उन्हें हिंदी फिल्म संगीत के बड़े गायकों की कतार में खड़ा कर देगी।
11 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था संगीत का सफर
अमित कुमार का बचपन कोलकाता में बीता, जहां वे दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अक्सर गीत गाया करते थे। ऐसे ही एक आयोजन में महान बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार ने उनकी प्रतिभा की खुले दिल से सराहना की। जब उनकी मां ने किशोर कुमार से शिकायत की कि अमित सिर्फ फिल्मी गाने गाने में रुचि लेते हैं, तब किशोर कुमार उन्हें अपने साथ मुंबई ले आए ताकि उनकी प्रतिभा को सही दिशा मिल सके।
फिल्मों में उनका सफर भी काफी कम उम्र में शुरू हो गया था। उन्होंने अपने पिता द्वारा निर्देशित फिल्म 'दूर गगन की छांव में' (1964) में बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया। इसके बाद महज 11 वर्ष की उम्र में फिल्म 'दूर का राही' (1971) के लिए 'मैं पंछी मतवाला रे' गीत रिकॉर्ड कर उन्होंने पार्श्वगायन की दुनिया में कदम रखा।
'याद आ रही है' ने दिलाई नई पहचान
अमित कुमार के करियर का सबसे बड़ा मोड़ वर्ष 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'लव स्टोरी' से आया। इस फिल्म का गीत 'याद आ रही है' जबरदस्त हिट साबित हुआ और अमित कुमार रातोंरात चर्चित पार्श्वगायक बन गए। इस सफलता की सबसे बड़ी पहचान अगले वर्ष आयोजित फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह में मिली।
बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर की श्रेणी में पिता और बेटे के बीच सीधा मुकाबला था। किशोर कुमार को फिल्म 'कुदरत' के गीत 'हमें तुमसे प्यार कितना' और फिल्म 'याराना' के लोकप्रिय गीत 'छूकर मेरे मन को' के लिए नामांकन मिला था। दूसरी ओर अमित कुमार 'याद आ रही है' के लिए दौड़ में शामिल थे। कड़े मुकाबले के बाद विजेता के रूप में अमित कुमार का नाम घोषित हुआ। उस ऐतिहासिक पल में किशोर कुमार ने पूरे गर्व के साथ मंच पर अपने बेटे को गले लगाया। यह क्षण हिंदी फिल्म संगीत के सबसे भावुक और यादगार लम्हों में गिना जाता है।
इसके बाद 1980 के दशक में अमित कुमार ने कुमार गौरव, अनिल कपूर और संजय दत्त जैसे कई युवा सितारों की आवाज बनकर अपनी अलग पहचान स्थापित की।
कई सुपरहिट गीतों से सजाया करियर
अमित कुमार ने अपने लंबे संगीत सफर में अनेक लोकप्रिय गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। उनके चर्चित गीतों में 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'याद आ रही है', 'एक दो तीन', 'रोज-रोज आंखों तले', 'उठे सबके कदम', 'तू रूठा तो मैं मान जाऊंगा', 'तिरछी टोपी वाले' और 'टिप टिप टिप बारिश' जैसे कई सुपरहिट गाने शामिल हैं।
13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार के अचानक निधन ने पूरे फिल्म उद्योग को गहरे सदमे में डाल दिया। पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए अमित कुमार ने उनकी अधूरी फिल्म 'ममता की छांव में' (1989) का निर्देशन संभाला और उसे पूरा किया। इसके कुछ वर्षों बाद, 4 जनवरी 1994 को उनके मार्गदर्शक और करीबी संगीतकार आर.डी. बर्मन का भी निधन हो गया। इन दोनों घटनाओं का अमित कुमार के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
1990 के दशक के मध्य में उन्होंने नियमित पार्श्वगायन से दूरी बना ली। इसके बाद उन्होंने अपनी संगीत संस्था 'कुमार ब्रदर्स म्यूजिक' की स्थापना की और स्वतंत्र संगीत निर्माण के साथ-साथ देश-विदेश में लाइव कॉन्सर्ट्स के जरिए संगीत प्रेमियों से जुड़ना जारी रखा। आज भी उनके गाए गीत और उनकी आवाज हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की याद दिलाते हैं।













