
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है। इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार से हो चुकी है। नवरात्रि का प्रथम दिन कलश स्थापना अथवा घटस्थापना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कलश की स्थापना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और निरोगी जीवन का आशीर्वाद देती हैं। घटस्थापना के साथ ही देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना प्रारंभ की जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णन है कि घटस्थापना करते समय यदि कुछ आवश्यक नियमों का पालन किया जाए तो पूजा का फल और अधिक शुभकारी होता है। आइए जानते हैं घटस्थापना से जुड़े प्रमुख नियम और सही मुहूर्त की जानकारी।
1. कलश का चुनाव
धार्मिक परंपरा के अनुसार घटस्थापना के लिए सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी से बने कलश को ही शुभ माना गया है। इन धातुओं से बने कलश सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। ध्यान रहे कि लोहे या स्टील का कलश प्रयोग में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ माना गया है।
2. स्थान की शुद्धि और अखंड ज्योत
कलश स्थापित करने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह शुद्ध करना अनिवार्य है। इसके लिए गंगाजल का छिड़काव किया जाता है। साथ ही, घटस्थापना के समय अखंड ज्योत प्रज्वलित करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
3. दिशा का महत्व
पूजा में दिशा का विशेष महत्व माना गया है। घटस्थापना हमेशा घर के पूर्व, उत्तर दिशा या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में करनी चाहिए। हिंदू धर्म शास्त्रों में ईशान कोण को देवताओं का स्थान माना गया है, इसलिए यहीं पर पूजा से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
4. कलश की स्थिति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को हमेशा मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र की दाहिनी ओर स्थापित करना चाहिए। इससे पूजा अधिक फलदायी मानी जाती है और घर में शांति एवं सौभाग्य का वास होता है।
5. नारियल रखने का तरीका
कलश स्थापना के लिए नारियल का चयन भी बहुत महत्वपूर्ण है। पूजा में हमेशा कच्चे नारियल का ही उपयोग करें। यदि नारियल को कलश पर लिटाकर रखा जाता है, तो उसका मुख पूजा करने वाले व्यक्ति की ओर होना चाहिए। वहीं अगर नारियल को खड़ा किया जाए, तो उसकी नोंक (नुकीला सिरा) जल की ओर नीचे और मुख ऊपर की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का फल संपूर्ण माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष निर्णय या अनुष्ठान से पहले योग्य पंडित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।














