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स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला चरण संपन्न, हाई-लेवल कमेटी के गठन पर बनी सहमति, अराघची ने दी पहली प्रतिक्रिया

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता संपन्न हो गई है। दोनों पक्ष हाई-लेवल कमेटी के गठन पर सहमत हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत को सकारात्मक बताया, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 22 Jun 2026 8:09:19

स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला चरण संपन्न, हाई-लेवल कमेटी के गठन पर बनी सहमति, अराघची ने दी पहली प्रतिक्रिया

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में अहम मानी जा रही बातचीत का पहला चरण समाप्त हो गया है। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने आगे की वार्ताओं को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी के गठन पर सहमति जताई है। इस घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान और कतर ने संयुक्त बयान जारी कर वार्ता को सकारात्मक बताया है। वहीं बातचीत खत्म होने के बाद ईरान की ओर से भी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान और कतर की निरंतर मध्यस्थता ने क्षेत्रीय तनाव कम करने और लेबनान संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिनमें ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों का हटना भी शामिल है।

अराघची ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू नाकेबंदी को समाप्त कर दिया गया है, जिससे समुद्री व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा ईरान की कुछ फ्रीज़ की गई संपत्तियों को भी जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास से जुड़ी व्यापक योजनाओं पर भी काम शुरू हो चुका है। हालांकि उनके अनुसार सबसे बड़ी चुनौती अब लेबनान में स्थापित किए जाने वाले डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल की प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना होगी।

उच्च स्तरीय समिति के गठन पर बनी आम सहमति

पाकिस्तान और कतर द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि लेक ल्यूसर्न समिट बेहद सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आयोजित हुई। बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने के संकेत मिले और तकनीकी स्तर पर वार्ताओं को जारी रखने के लिए एक संस्थागत ढांचा विकसित करने पर सहमति बनी।

बयान के अनुसार, हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत सभी पक्षों ने एक हाई-लेवल कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति पूरे मध्यस्थता तंत्र की राजनीतिक निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बातचीत तय दिशा में आगे बढ़े। मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस समिति को प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे और विभिन्न कार्य समूहों का संचालन करेंगे।

इन कार्य समूहों में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। उद्देश्य यह रहेगा कि समझौता ज्ञापन के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके और किसी भी विवाद का समय रहते समाधान निकाला जा सके।

60 दिनों के भीतर रोडमैप तैयार करने का लक्ष्य

संयुक्त बयान में यह भी बताया गया कि हाई-लेवल कमेटी ने अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के लक्ष्य पर सहमति जताई है। इस रोडमैप का उद्देश्य अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए स्पष्ट दिशा तय करना होगा। इसके साथ ही तकनीकी स्तर की बातचीत को तत्काल प्रभाव से आगे बढ़ाने का रास्ता भी साफ हो गया है।

बैठक में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए पक्षों के बीच एक विशेष संचार प्रणाली स्थापित करने पर सहमति बनी है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी, दुर्घटना या तनावपूर्ण स्थिति को समय रहते रोका जा सके।

बताया गया कि समझौता ज्ञापन के पैराग्राफ-5 के तहत निर्धारित अवधि तक यह संचार तंत्र सक्रिय रहेगा और सभी पक्ष नियमित रूप से इसका उपयोग करेंगे। इससे क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

लेबनान में सैन्य गतिविधियां रोकने पर भी बनी सहमति

बैठक के दौरान लेबनान की स्थिति भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रही। संयुक्त बयान में कहा गया कि सभी पक्ष लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकने के लिए किए गए समझौते के पालन को सुनिश्चित करने हेतु एक विशेष 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' स्थापित करने पर सहमत हुए हैं।

यह सेल विभिन्न पक्षों और लेबनान के बीच समन्वय स्थापित करेगा तथा संघर्ष की संभावनाओं को कम करने के लिए काम करेगा। इस प्रक्रिया में मध्यस्थ देशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो संचार और समन्वय बनाए रखने में सहयोग करेंगे।

बयान के अनुसार, स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में इस सप्ताह के शेष दिनों में भी तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहेगी। विशेषज्ञों की टीमें विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगी ताकि आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।

वार्ता के बीच ट्रंप का ईरान पर तीखा बयान

एक ओर जहां स्विट्जरलैंड में बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। वार्ता के बीच दिए गए अपने बयान में ट्रंप ने तेहरान पर क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि ईरान को लेबनान में उन समूहों को समर्थन देना बंद करना चाहिए जिन्हें वह आर्थिक सहायता प्रदान करता है। ट्रंप के अनुसार ये संगठन क्षेत्र में लगातार तनाव और अशांति पैदा कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया तो अमेरिका और अधिक सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले सप्ताह की गई कार्रवाई केवल एक संकेत थी और आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में उससे भी अधिक कठोर प्रतिक्रिया दी जा सकती है। ट्रंप के इस बयान ने वार्ता के बीच एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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