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शाम 7:30 बजे होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना की नाकेबंदी की तैयारी, ईरानी बंदरगाहों से गुजरने वाले हर तेल जहाज पर मंडराया बड़ा खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना द्वारा नाकेबंदी की तैयारी से वैश्विक तनाव बढ़ गया है। ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले तेल जहाजों पर खतरे के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 13 Apr 2026 7:56:53

शाम 7:30 बजे होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना की नाकेबंदी की तैयारी, ईरानी बंदरगाहों से गुजरने वाले हर तेल जहाज पर मंडराया बड़ा खतरा

अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की तैयारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव तेजी से बढ़ गया है। सोमवार, 13 अप्रैल को शाम करीब 7.30 बजे से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सख्त कार्रवाई शुरू होने की खबर सामने आई है, जिसके बाद कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। बताया जा रहा है कि ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले हर जहाज को इस कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है, जिससे ऊर्जा बाजारों में भी हलचल तेज हो गई है।

इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व में नए सिरे से युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका गहरा रही है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि बातचीत में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने से इनकार कर दिया, जबकि ईरान का आरोप है कि समझौते की दिशा में लगभग सहमति बन चुकी थी, लेकिन अमेरिका ने अचानक अपनी शर्तें बदल दीं, जिससे पूरा संवाद टूट गया।

अमेरिकी सेना का आधिकारिक बयान

यूएस सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अरब सागर और ओमान की खाड़ी के साथ-साथ ईरानी बंदरगाहों व तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर सख्ती से निगरानी और रोकथाम लागू की जाएगी। आदेश के अनुसार, किसी भी देश के जहाज जो ईरानी बंदरगाहों की ओर या वहां से बाहर जाएंगे, उन्हें जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह प्रक्रिया भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 7.30 बजे से लागू होने की बात कही गई है।

हालांकि, बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच संचालित होने वाले जहाजों को सीधे तौर पर बाधित नहीं किया जाएगा। अमेरिकी सेना ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में नाविकों और शिपिंग कंपनियों के लिए अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि समुद्री गतिविधियों को नियंत्रित ढंग से संचालित किया जा सके।

इसी बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर उनकी मजबूत पकड़ है और किसी भी हस्तक्षेप को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बताते हुए कठोर प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर यह विवाद नया नहीं है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस क्षेत्र को लेकर कड़े रुख का संकेत दिया था। अपने एक लंबे सोशल मीडिया संदेश में उन्होंने कहा था कि अमेरिका का उद्देश्य इस जलमार्ग को बारूदी सुरंगों से मुक्त करना और इसे सभी वैश्विक शिपिंग के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान को इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नियंत्रण से किसी भी प्रकार का लाभ नहीं उठाने दिया जाएगा। ट्रंप ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि किसी ने अमेरिकी या शांतिपूर्ण जहाजों पर हमला किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

दूसरी ओर, अमेरिकी नौसेना से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसके दो युद्धपोतों ने हाल ही में होर्मुज क्षेत्र से गुजरकर बारूदी सुरंगों की जांच की और मार्ग को टैंकरों के लिए सुरक्षित घोषित किया। हालांकि ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है। ईरानी मीडिया संस्थान फार्स न्यूज एजेंसी ने यह भी रिपोर्ट किया कि होर्मुज की ओर बढ़ रहे दो पाकिस्तानी ध्वज वाले तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा, जिससे समुद्री व्यापार पर दबाव और बढ़ गया है।

‘समझौता लगभग पूरा होने वाला था’ — ईरान का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका था और दोनों पक्षों के बीच अंतर सिर्फ “कुछ इंच” का रह गया था। लेकिन इसी दौरान उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने लगातार अपने रुख में बदलाव किया और कड़े प्रतिबंधात्मक कदमों की ओर बढ़ गया।

उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया के दौरान अतिवाद और शर्तों में बदलाव ने पूरे समझौते को असंभव बना दिया। उनके अनुसार, नाकेबंदी और दबाव की रणनीति ने संवाद को कमजोर किया और हालात को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।

इस्लामाबाद वार्ता के असफल होने के बाद अब वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो मध्य पूर्व में एक बार फिर सशस्त्र संघर्ष भड़क सकता है। इसके साथ ही तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

सोमवार को कारोबार शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में इसका असर साफ दिखाई दिया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल मई डिलीवरी के लिए लगभग आठ प्रतिशत की बढ़त के साथ 104.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड जून डिलीवरी के लिए करीब सात प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

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