अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अप्रैल में हुए युद्धविराम (सीजफायर) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समाप्त घोषित किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार तेज हो गई है। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह सहित कई अहम ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस अभियान में करीब 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान ने लगातार दूसरे दिन कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। बढ़ते तनाव के बीच कुवैत में सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।
चाबहार में लगातार धमाके, कई इलाकों में बिजली व्यवस्था ठप
अमेरिकी हमलों के बाद चाबहार में कई जोरदार विस्फोटों की खबर सामने आई है। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, हमलों के बाद शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और व्यापक स्तर पर ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके तुरंत बाद राहत और आपातकालीन सेवाओं की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गईं। अप्रैल में घोषित युद्धविराम के बाद यह पहली बार है जब इस रणनीतिक बंदरगाह को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा गोलेस्तान प्रांत स्थित अक टेकेह खान रेलवे ब्रिज पर भी मिसाइल हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।
भारत के लिए क्यों बेहद अहम है चाबहार पोर्ट?
ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह भारत की सामरिक और आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह ईरान का एकमात्र डीप-वॉटर पोर्ट है, जिसकी सीधी पहुंच हिंद महासागर तक है। भारत के लिए इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि इसके माध्यम से पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक व्यापारिक पहुंच संभव होती है।
चाबहार पोर्ट भारत को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो यूरेशिया तक व्यापार बढ़ाने की भारत की दीर्घकालिक योजना का अहम हिस्सा है। रणनीतिक दृष्टि से यह बंदरगाह चीन द्वारा विकसित किए जा रहे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से करीब 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में इसे क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के रूप में भी देखा जाता है। हाल के वर्षों में भारत ने चाबहार पोर्ट और चाबहार-जाहेदान रेल परियोजना के विकास को गति दी थी, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कई परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई।
#WATCH | U.S. Central Command releases a video that shows U.S. military strikes on Iranian military targets
— ANI (@ANI) July 9, 2026
The official account of U.S. Central Command tweets, "U.S. Central Command (CENTCOM) forces completed an additional round of strikes against Iran, July 8, to further… pic.twitter.com/9X3xChlCjz
अमेरिकी सेना ने हमलों की वजह बताई
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य उन समुद्री और सैन्य ढांचों को नष्ट करना था, जिनका इस्तेमाल ईरान कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में कर रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए दावा किया कि इस कार्रवाई में करीब 90 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हमलों में जहाजों के घाट, समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और आसपास मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अमेरिकी पक्ष का कहना है कि नागरिक बंदरगाह सुविधाओं और ऊर्जा अवसंरचना को नुकसान से बचाने की कोशिश की गई।
तीन कार्गो जहाजों पर हमले के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिका का कहना है कि यह अभियान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर हुए हमले के जवाब में शुरू किया गया। वाशिंगटन ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना जारी रखता है, तो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और अधिक तीव्र होगी।
ट्रंप बोले- हर हमले का देंगे कई गुना जवाब
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को उसकी कार्रवाई से कहीं अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने "एक के बदले 20" की नीति अपनाते हुए जवाब दिया है। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान भविष्य में कोई हमला करता है तो अमेरिका उससे कई गुना अधिक ताकत के साथ प्रतिक्रिया देगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका पूर्ण युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है, तो ट्रंप ने कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनती भी है तो अमेरिका बहुत कम समय में जीत हासिल कर लेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य दृष्टि से अमेरिका बढ़त बना चुका है और ईरान अब समझौता करना चाहता है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें संदेह है कि तेहरान किसी संभावित समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।
ईरान ने भी दिखाई जवाबी ताकत
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि देश का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और संभावित हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। कई इलाकों में एहतियातन सायरन भी बजाए गए।
इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वाशिंगटन अब भी यह नहीं समझ पाया है कि दबाव की राजनीति और वादाखिलाफी की कीमत चुकानी ही पड़ती है। उनके इस बयान से साफ संकेत मिले हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव फिलहाल कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।














