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आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं, कहा- तबीयत बिगड़ने पर फिर कर सकते हैं आवेदन

आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत नहीं मिली। कोर्ट ने कहा कि तबीयत बिगड़ने पर दोबारा आवेदन किया जा सकता है। AIIMS मेडिकल रिपोर्ट और मामले की पूरी जानकारी पढ़ें।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 06 Aug 2026 5:00:46

आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं, कहा- तबीयत बिगड़ने पर फिर कर सकते हैं आवेदन

जोधपुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं मिली है। स्वास्थ्य संबंधी आधार पर दायर उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया है, बल्कि लंबित रखते हुए कहा कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गंभीर होती है तो वह दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम राहत देने का कोई आधार नहीं बनता। ऐसे में मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।

राजस्थान सरकार ने उठाया तथ्यों को छिपाने का मुद्दा


सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में 20 दिन की परोल की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दायर अंतरिम जमानत याचिका में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया।

सरकार की ओर से कहा गया कि फिलहाल आसाराम को हाई कोर्ट से 20 दिनों की परोल मिल चुकी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सभी संबंधित तथ्यों की जानकारी देना आवश्यक था। इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार ने अदालत के सामने अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई।

पिछली सुनवाई में एम्स से मांगी गई थी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत परीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। अदालत स्वास्थ्य संबंधी तथ्यों के आधार पर ही अंतरिम जमानत की मांग पर निर्णय लेना चाहती थी।

एम्स द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें 24 घंटे चिकित्सकीय निगरानी और नियमित मेडिकल देखभाल की आवश्यकता है।

मंगलवार की सुनवाई में भी मेडिकल रिपोर्ट पर हुई थी चर्चा

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान भी एम्स की मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी गई थी। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ को बताया गया कि मेडिकल बोर्ड की राय के अनुसार आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की फिलहाल आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें लगातार चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि एम्स की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जेल प्रशासन की ओर से आसाराम को आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनके इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं है।

मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश पहले ही दे चुकी थी सुप्रीम कोर्ट

आसाराम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट को केवल एक हिस्से के आधार पर नहीं बल्कि समग्र रूप से पढ़ा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि रिपोर्ट में स्वास्थ्य संबंधी कई ऐसी बातें भी दर्ज हैं, जिन पर अदालत को विचार करना चाहिए।

गौरतलब है कि 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स को निर्देश दिया था कि आसाराम की चिकित्सीय स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। उसी बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर अदालत में आगे की सुनवाई हुई।

हाई कोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है उम्रकैद की सजा

राजस्थान हाई कोर्ट ने 27 मई को वर्ष 2013 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद आसाराम ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया था। अब स्वास्थ्य आधार पर दायर अंतरिम जमानत याचिका पर भी अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और भविष्य में स्वास्थ्य स्थिति में बदलाव होने पर आसाराम दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं।

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