कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता रिजु दत्ता के बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कभी टीएमसी के पक्ष में मुखर रहने वाले रिजु दत्ता अब बदले हुए तेवर में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की खुलकर सराहना की है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी की संयमित अपील की वजह से हजारों तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जान बच सकी।
रिजु दत्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद संभाले अभी सिर्फ दो दिन हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने बड़ा संदेश दिया है। दत्ता के मुताबिक, यदि शुभेंदु अधिकारी चाहते तो हालात पूरी तरह बेकाबू हो सकते थे, लेकिन उन्होंने बदले की राजनीति से दूरी बनाते हुए शांति और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बनने से पहले 6 मई को शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण था। अगर उस समय शुभेंदु अधिकारी अस्पताल से बाहर आकर अपने समर्थकों से बदला लेने की बात कहते, तो उसी रात बंगाल में भारी हिंसा भड़क सकती थी। हजारों तृणमूल कार्यकर्ता निशाने पर आ जाते और हालात भयावह हो सकते थे।”
रिजु दत्ता ने आगे कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों को साफ शब्दों में कानून हाथ में न लेने की हिदायत दी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि प्रशासन पूरे मामले को देख रहा है। दत्ता ने कहा, “उन्होंने संयम दिखाया और अपने कार्यकर्ताओं को भी संयम रखने को कहा। इसी वजह से कम से कम 5000 तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जान बची है। मैं उनके इस रवैये को सलाम करता हूं।”
#WATCH | Kolkata, West Bengal: Suspended TMC leader, Riju Dutta says, "Suvendu Adhikari has saved the lives of at least 5,000 Trinamool Congress workers..."
He says, "Suvendu Adhikari has been the Chief Minister for only two days, but within these two days, he saved the lives…
उन्होंने यह भी कहा कि अब शुभेंदु अधिकारी सिर्फ बीजेपी के नेता नहीं रहे, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं। एक बंगाली नागरिक होने के नाते जनता उनसे बड़ी उम्मीदें रखती है। रिजु दत्ता ने कहा कि अब राज्य की जनता यह देखेगी कि मुख्यमंत्री अपने वादों को किस तरह पूरा करते हैं और क्या सच में बंगाल में राजनीतिक हिंसा को रोकने में सफल होते हैं।
दत्ता ने कहा, “हम नजर रखेंगे कि बंगाल में महिलाओं को सुरक्षा मिलती है या नहीं, अपराधियों और गुंडों पर कार्रवाई होती है या नहीं और आम लोग बिना डर के जीवन जी पाते हैं या नहीं। मैं भले ही अब तृणमूल कांग्रेस में नहीं हूं, लेकिन एक बंगाली होने के नाते शुभेंदु अधिकारी से सवाल जरूर करूंगा यदि सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरती। क्योंकि अब वे सिर्फ बीजेपी के नहीं, बल्कि पूरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं।”
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। चुनाव नतीजों में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ, जबकि तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों तक सिमट गई। इसी बड़ी जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को राज्य की कमान सौंपी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बीजेपी की यह जीत पार्टी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय बाद राज्य की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।














