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बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का क्या था भारत से जुड़ा खास रिश्ता?

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद उनके राजनीतिक सफर, भारत से जुड़े खास रिश्ते, जियाउर रहमान से विवाह और बांग्लादेश की राजनीति में उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर एक विस्तृत नजर।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 30 Dec 2025 8:42:14

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का क्या था भारत से जुड़ा खास रिश्ता?

बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया का मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर की। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहीं खालिदा जिया ढाका के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रही थीं, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ बीएनपी बल्कि पूरे बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है।

पार्टी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, खालिदा जिया कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थीं। उन्हें लिवर सिरोसिस, गठिया, मधुमेह के साथ-साथ सीने और हृदय से जुड़ी बीमारियां भी थीं। पिछले काफी समय से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए थी। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद आखिरकार इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

खालिदा जिया का प्रारंभिक जीवन

खालिदा जिया का जन्म वर्ष 1946 में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। उस समय यह क्षेत्र अविभाजित दिनाजपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। यही वजह है कि उनका भारत से एक भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव माना जाता है। बाद में उन्होंने बांग्लादेश की राजनीति में कदम रखा और अपने राजनीतिक कौशल तथा दृढ़ नेतृत्व के बल पर एक अलग पहचान बनाई। 1991 के बाद वह तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए इस पद तक पहुंचने वाली देश की पहली महिला बनीं।

जियाउर रहमान से विवाह और राजनीति की शुरुआत

खालिदा जिया का जीवन उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंचा जब उनका विवाह बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान से हुआ। जियाउर रहमान के राष्ट्रपति बनने के बाद खालिदा जिया देश की फर्स्ट लेडी बनीं। हालांकि 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। पति के असमय निधन के बाद ही खालिदा जिया ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने का फैसला किया और यहीं से उनके राजनीतिक सफर की असली शुरुआत हुई।

बीएनपी में उभार और नेतृत्व

पति की मृत्यु के बाद खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में एक सामान्य सदस्य के रूप में शामिल हुईं। धीरे-धीरे पार्टी के भीतर उनकी भूमिका मजबूत होती गई। 1983 में उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया और महज एक वर्ष बाद ही वह बीएनपी की चेयरपर्सन चुनी गईं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने नई रणनीति और दिशा अपनाई, जिससे वह बांग्लादेश की राजनीति में एक सशक्त विपक्षी ताकत के रूप में उभरी।

तानाशाही के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक

खालिदा जिया को 1983 में गठित सात-दलीय गठबंधन का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इस गठबंधन का उद्देश्य तत्कालीन सैन्य शासक जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद के तानाशाही शासन को समाप्त करना था। उनके नेतृत्व में चला आंदोलन बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक अहम अध्याय बन गया। इस संघर्ष ने उन्हें एक मजबूत जननेता के रूप में स्थापित किया और लोकतंत्र की बहाली में उनकी भूमिका को व्यापक पहचान मिली।

राजनीतिक विरासत और भारत से जुड़ाव

खालिदा जिया की राजनीतिक पहचान शेख हसीना के साथ लंबे समय तक चले सत्ता संघर्ष के कारण भी जानी जाती है। दोनों नेताओं के बीच दशकों तक चली राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय की। एक महिला नेता के रूप में खालिदा जिया ने सत्ता, संघर्ष और नेतृत्व की मजबूत मिसाल पेश की। भारत में जन्म लेने के कारण उनका नाम अक्सर दोनों देशों के साझा इतिहास और सांस्कृतिक रिश्तों के संदर्भ में भी लिया जाता रहा है।

खालिदा जिया का निधन एक ऐसे दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने बांग्लादेश की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। उनका जीवन संघर्ष, सत्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों की कहानी के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

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