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इजरायली हमलों से सबक: ईरान ने बदली सैन्य रणनीति, अब नहीं होंगे कमांडर की नियुक्ति के ऐलान

इजराइल के टारगेट किलिंग से सबक लेते हुए ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रमुख सैन्य ब्रिगेड्स में कमांडर की नियुक्ति सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यह फैसला खतम अल-अनबिया ब्रिगेड पर हुए इजरायली हमलों के बाद लिया गया है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Tue, 01 Jul 2025 6:02:34

इजरायली हमलों से सबक: ईरान ने बदली सैन्य रणनीति, अब नहीं होंगे कमांडर की नियुक्ति के ऐलान

इजराइल से हुए हालिया संघर्ष और उसके बाद हुए सीजफायर के बीच ईरान अब अपनी सुरक्षा रणनीति को नए सिरे से कसने में जुट गया है। ये वो वक्त है जब देश अपनी हर चूक से सबक लेकर अपने सैन्य ढांचे को और अधिक मजबूत और सतर्क बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी दिशा में ईरान ने एक बड़ा और बेहद सोच-समझकर लिया गया फैसला लिया है—अब कुछ सैन्य संगठनों में प्रमुखों की नियुक्ति सार्वजनिक तौर पर नहीं की जाएगी।

असल में, 13 जून को जैसे ही जंग की शुरुआत हुई, इजराइल ने ईरान के 10 सैन्य कमांडरों को एक के बाद एक टारगेट कर मार गिराया था। यह किसी भी देश की सैन्य रीढ़ को झकझोरने वाला आघात था। अब ईरान इस स्थिति को दोहराना नहीं चाहता।

ईरानी मीडिया ने किया खुलासा

ईरान के जाने-माने अखबार 'काहयान' की मानें तो खतम अल-अनबिया नामक अहम ब्रिगेड में नया प्रमुख अपनी जिम्मेदारी संभाल चुका है, लेकिन सरकार ने सार्वजनिक तौर पर उसका नाम घोषित नहीं किया है। इसका कारण भी बेहद साफ है—इजराइली टारगेटिंग से बचाव।

गौरतलब है कि जंग के शुरुआती दिनों में ही इस ब्रिगेड के प्रमुख अली शादमानी को इजराइली हमले में मार दिया गया था। उनके बाद जो व्यक्ति इस पद पर आया, उसे भी कुछ ही समय बाद इजराइल ने निशाना बना लिया।

खतम अल-अनबिया आखिर है क्या?

यह कोई साधारण सैन्य यूनिट नहीं, बल्कि ईरान की सबसे अहम इंजीनियरिंग ब्रिगेड है, जिसे 'पैगंबरों की मुहर' का नाम दिया गया है। यह ब्रिगेड सीधे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अंतर्गत काम करती है। इसे ‘GHORB’ के नाम से भी जाना जाता है और इसका काम है मिसाइल निर्माण, हथियारों की निगरानी और रणनीतिक परियोजनाएं।

1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण के लिए इस यूनिट का गठन हुआ था, लेकिन आज ये संगठन देश की सैन्य शक्ति की रीढ़ बन चुका है। इसके प्रमुख को देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का बेहद करीबी माना जाता है।

हमास वाली रणनीति अपना रहा है ईरान?

अब सवाल ये उठता है कि क्या ईरान हमास की रणनीति अपना रहा है? क्योंकि जब इजराइल ने हमास के नेता याह्या सिनवार को मार गिराया था, तब हमास ने नए कमांडर की कोई घोषणा नहीं की थी। उनका तर्क था कि जैसे ही किसी का नाम घोषित किया जाएगा, इजराइल उसे भी खत्म कर देगा।

ठीक उसी तर्ज पर ईरान ने भी अब अपने नए सैन्य प्रमुखों के नाम सार्वजनिक न करने की राह चुनी है। यह एक साइलेंट डिफेंस मैकेनिज्म बनकर उभर रहा है।

ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने साफ तौर पर कहा है, "हम अब पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएंगे। हमारे लिए यह एक झटका जरूर था, लेकिन ईरान की बुनियाद बेहद मजबूत है।"

यह निर्णय सिर्फ एक संगठन की सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि ये दिखाता है कि ईरान अब अपने दुश्मनों की रणनीति को ध्यान में रखते हुए अपना हर कदम बेहद सोच-समझकर रख रहा है — चुपचाप, लेकिन मजबूती से।

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