वर्क फ्रॉम होम को आमतौर पर सुविधा, समय की बचत और काम में लचीलापन देने वाला विकल्प माना जाता है। लेकिन दिल्ली की तान्या सिंघल ने इसके एक ऐसे पहलू की ओर ध्यान खींचा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। तान्या ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से घर से काम करने के दौरान उनकी सोशल लाइफ पर असर पड़ा है। उनका कहना है कि ऑफिस से दूर होने के कारण रोजमर्रा की सहज बातचीत और नए लोगों से दोस्ती करने के अवसर काफी कम हो गए।
तान्या ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @tanya.singhall पर इस अनुभव को वीडियो के जरिए साझा किया। उनका कहना है कि वर्क फ्रॉम होम के फायदे तो अक्सर बताए जाते हैं, लेकिन इस दौरान सामाजिक मेलजोल के स्तर पर क्या बदलाव आता है, इस पर उतनी चर्चा नहीं होती।
ऑफिस की छोटी-छोटी बातचीत का महत्व
वीडियो में तान्या ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि वर्क फ्रॉम होम शुरू होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि ऑफिस केवल काम करने की जगह नहीं था। वहां दिन के दौरान होने वाली छोटी-छोटी बातचीत भी सामाजिक जीवन का हिस्सा बन जाती थी।
उन्होंने बताया कि वह अपने होमटाउन में नहीं रहतीं और कॉलेज के दोस्त भी अलग-अलग शहरों में बस चुके हैं। ऐसे में नए लोगों से मिलने और नई दोस्ती बनाने के लिए ऑफिस उनके लिए अहम जगह था।
तान्या के मुताबिक, ऑफिस में किसी सहकर्मी का डेस्क के पास से गुजरना, कॉफी के लिए पूछना या अचानक साथ लंच करने का प्लान बन जाना जैसी चीजें बिना किसी खास तैयारी के हो जाती थीं। उनके अनुसार, घर से काम करते हुए इस तरह की अनियोजित बातचीत की संभावना बहुत कम हो जाती है और पूरा दिन बिना किसी सामाजिक संपर्क के गुजर सकता है।
वर्क फ्रॉम होम के फायदे भी माने
तान्या ने वर्क फ्रॉम होम के फायदों से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि घर से काम करने पर रोज ऑफिस आने-जाने की जरूरत नहीं रहती, कहीं से काम करने की सुविधा मिलती है, समय में लचीलापन रहता है और अपने लिए अतिरिक्त समय भी मिल सकता है।
लेकिन उनके मुताबिक, इन सुविधाओं के साथ सामाजिक जीवन से जुड़ा एक पहलू धीरे-धीरे कम हो सकता है। उन्होंने अपने वीडियो में इसी बदलाव को उजागर करने की कोशिश की।
स्कूल-कॉलेज के बाद दोस्ती बनाना क्यों मुश्किल लगता है?
तान्या ने यह भी कहा कि स्कूल और कॉलेज के बाद नए दोस्त बनाना वयस्कों के लिए पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है। स्कूल और कॉलेज में लोगों से नियमित रूप से मिलने का अवसर मिलता है, जबकि नौकरी के बाद ऐसे स्वाभाविक सामाजिक मौके सीमित हो जाते हैं।
उनके अनुभव में ऑफिस ऐसी जगहों में शामिल था जहां रोजाना नए या परिचित लोगों से मुलाकात होती थी। वर्क फ्रॉम होम के कारण यह नियमित संपर्क खत्म होने पर नई दोस्ती के लिए अलग से प्रयास करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अब किसी नए व्यक्ति से मिलने के लिए नेटवर्किंग इवेंट में जाना, किसी ग्रुप का हिस्सा बनना या अकेले यात्रा जैसे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। उनके अनुसार, इन गतिविधियों में पहले से योजना बनानी पड़ती है, जबकि ऑफिस में बातचीत कई बार अपने आप शुरू हो जाती थी।
सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अपने अनुभव
तान्या के वीडियो पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी और उनके अनुभव से खुद को जोड़कर देखा। कुछ लोगों ने कहा कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान उन्हें भी अकेलेपन या कम सामाजिक संपर्क का अनुभव हुआ है।
वीडियो के कैप्शन में तान्या ने वर्क फ्रॉम होम के उस पहलू की ओर इशारा किया, जिसके बारे में उनके मुताबिक कम बात होती है। उनके इस अनुभव ने सोशल मीडिया पर काम और निजी जिंदगी के बीच सामाजिक संपर्क की भूमिका को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
हालांकि, तान्या का वीडियो उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम के दौरान अपनी सोशल लाइफ में आए बदलाव को साझा किया है, जिसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपने अनुभवों से जोड़कर देखा।













