अगर आपके घर के RO पानी का TDS बहुत कम आ रहा है, तो सिर्फ इस आंकड़े को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि पानी ज्यादा शुद्ध है या पीने के लिए बेहतर है। Total Dissolved Solids यानी TDS पानी में घुले हुए विभिन्न पदार्थों, जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और दूसरे लवणों की कुल मात्रा का संकेत देता है। लेकिन TDS अपने आप में पानी की पूरी सुरक्षा का पैमाना नहीं है। WHO के अनुसार TDS के लिए कोई health-based guideline value तय नहीं की गई है।
BIS के हिसाब से कितना TDS होना चाहिए
भारत में drinking water के लिए BIS का IS 10500 मानक इस्तेमाल किया जाता है। इसके अनुसार पानी में TDS की स्वीकार्य सीमा 500 mg/L है। अगर कोई वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध नहीं है, तो 2000 mg/L तक की सीमा को permissible limit माना गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि 500 से कम TDS वाला हर पानी सुरक्षित और 500 से ज्यादा वाला हर पानी असुरक्षित है। पानी की गुणवत्ता तय करने के लिए TDS के अलावा कई दूसरे मानकों की भी जांच जरूरी होती है।
WHO TDS के बारे में क्या कहता है
WHO के अनुसार TDS में मुख्य रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट जैसे घुले पदार्थ शामिल होते हैं। TDS का असर खास तौर पर पानी के स्वाद पर पड़ता है। WHO के दस्तावेज के मुताबिक 600 mg/L से कम TDS वाला पानी आम तौर पर स्वाद की दृष्टि से अच्छा माना जाता है, जबकि करीब 1000 mg/L से ऊपर पानी का स्वाद तेजी से कम स्वीकार्य हो सकता है। WHO ने TDS के लिए अलग से health-based guideline value प्रस्तावित नहीं की है।
क्या बहुत कम TDS वाला RO पानी नुकसानदायक है
RO प्रक्रिया पानी में मौजूद कई घुले हुए पदार्थों और लवणों को कम कर सकती है। इसलिए RO के बाद TDS काफी नीचे आ सकता है। लेकिन केवल कम TDS देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि पानी स्वास्थ्य के लिए खराब है।
National Institute of Hydrology की जानकारी के मुताबिक पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक का चुनाव पानी की वास्तविक गुणवत्ता के आधार पर किया जाना चाहिए। संस्थान की जानकारी में यह भी बताया गया है कि जिन जगहों पर पानी का TDS पहले से कम है, वहां RO का इस्तेमाल जरूरी नहीं हो सकता।
इसलिए अगर आपके घर के स्रोत के पानी का TDS पहले से कम है, तो केवल TDS घटाने के लिए RO लगाना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए। पानी में बैक्टीरिया, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक या दूसरे संदूषक हैं या नहीं, यह जानने के लिए संबंधित water-quality test ज्यादा उपयोगी है।
50 या 100 TDS आने पर क्या करें
RO के पानी का TDS 50, 100 या इससे कम आने पर केवल इस संख्या के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। दूसरी तरफ, केवल TDS को बढ़ाकर पानी को सुरक्षित मान लेना भी सही तरीका नहीं है।
अगर RO के बाद पानी का स्वाद अचानक बदल गया है या TDS में पहले की तुलना में बहुत ज्यादा बदलाव आया है, तो purifier की settings, filters और membrane की स्थिति की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
BIS के RO-based point-of-use water treatment standard में RO systems में TDS display meter लगाने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे पानी में TDS की निगरानी की जा सके।
सिर्फ TDS देखकर पानी की गुणवत्ता तय न करें
TDS meter केवल पानी में मौजूद dissolved solids की मात्रा का अनुमान देता है। यह अपने आप यह नहीं बताता कि पानी में कौन-सा पदार्थ मौजूद है और वह सुरक्षित है या नहीं।
उदाहरण के लिए, कम TDS वाला पानी भी किसी खास रासायनिक या माइक्रोबियल संदूषण से प्रभावित हो सकता है। इसी तरह अधिक TDS का मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में पानी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित है। इसलिए पानी की वास्तविक गुणवत्ता जानने के लिए जरूरत के अनुसार laboratory testing जरूरी हो सकती है।
अगर आपके घर में RO लगा है, तो TDS के साथ-साथ स्रोत के पानी की गुणवत्ता, purifier की सही maintenance और संबंधित water-quality parameters की जांच पर ध्यान देना चाहिए। BIS के drinking-water standard में TDS के अलावा pH, turbidity, calcium, magnesium, chloride, nitrate, fluoride और microbiological parameters समेत कई दूसरे मानक भी शामिल हैं।













