भारत का इकलौता बेनाम रेलवे स्टेशन, फिर यात्री कैसे कटवाते हैं टिकट?
By: Sandeep Gupta Fri, 31 Jan 2025 1:30:19
भारतीय रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, क्योंकि यह पूरे भारत को जोड़ने का काम करता है। यह लाखों लोगों और भारी माल परिवहन के लिए सबसे अहम साधन है। भारत में हजारों रेलवे स्टेशन हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है जिसका कोई आधिकारिक नाम ही नहीं है?
कहां है यह बेनाम रेलवे स्टेशन?
यह अनोखा रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में स्थित है और बर्दवान शहर से 35 किलोमीटर दूर है। इस स्टेशन से कई यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन आज तक इसे कोई नाम नहीं मिल सका। 2008 से यह रेलवे स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है, और यह अपने आप में एक रोचक रहस्य बना हुआ है। इस रेलवे स्टेशन का नाम एक क्षेत्रीय विवाद के कारण नहीं रखा जा सका। यह स्टेशन रैना और रैनागर गांवों के बीच स्थित है, और दोनों गांवों के लोग इसे अपने गांव के नाम पर रखने की मांग कर रहे थे। जब 2008 में भारतीय रेलवे ने इसे "रैनागर" नाम दिया, तो स्थानीय लोगों ने इस पर आपत्ति जता दी और रेलवे बोर्ड से नाम बदलने की मांग की। मामला अदालत तक पहुंच गया, और तब से इस स्टेशन को कोई नया नाम नहीं दिया जा सका।
यात्रियों के लिए पहेली बना यह रेलवे स्टेशन
इस बेनाम रेलवे स्टेशन पर आते ही लोग भ्रमित हो जाते हैं। स्टेशन के दोनों ओर पीले रंग के खाली साइनबोर्ड लगे हैं, जो इस विवाद की मूक गवाही देते हैं। जो यात्री पहली बार यहां उतरते हैं, वे अक्सर असमंजस में पड़ जाते हैं। उन्हें आसपास के लोगों से पूछकर ही पता चलता है कि वे किस स्थान पर आए हैं।
दिन में सिर्फ 6 बार रुकती है ट्रेन
इस स्टेशन पर केवल बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है, और वह भी दिन में सिर्फ छह बार। रविवार को जब यहां कोई ट्रेन नहीं आती, तो स्टेशन मास्टर अगले सप्ताह की बिक्री के लिए बर्दवान शहर जाकर टिकट खरीदते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यहां बिकने वाली टिकटों पर अब भी पुराना नाम "रैनागर" ही छपा होता है। हालांकि, स्टेशन का नाम आधिकारिक रूप से हटाया जा चुका है, लेकिन टिकटों पर वही नाम आज भी जारी है, जिससे यह स्टेशन और भी रहस्यमय बन जाता है।
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