नई दिल्ली: कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की सलाहकार समिति की पहली बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार को लेकर तीखा और व्यापक राजनीतिक संदेश दिया। बैठक दिल्ली में आयोजित की गई, जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान राहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति, राजनीतिक दिशा और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।
राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि उनका स्पष्ट आकलन है कि आने वाले एक वर्ष में देश की आर्थिक स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि सरकार भारी दबाव में आ जाएगी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं होगा और उनका यह “आकलन गलत साबित नहीं होता”।
उन्होंने आगे कहा कि देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियां, घटता विदेशी निवेश और असंतुलित नीतियां आने वाले समय में गंभीर परिणाम पैदा कर सकती हैं। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार जिस दिशा में आर्थिक प्रबंधन कर रही है, वह टिकाऊ नहीं है और इसका असर सीधे शासन व्यवस्था पर पड़ेगा।
बैठक के दौरान उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि देश में ध्रुवीकरण की राजनीति अब लंबे समय तक नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई है, जिसे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक कांग्रेस को अपनी राजनीति को सामाजिक वर्गों से ऊपर उठाकर आर्थिक न्याय की लड़ाई पर केंद्रित करना होगा।
राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस को किसी भी समुदाय के उत्पीड़न के खिलाफ खुलकर खड़ा होना चाहिए, बिना किसी संकोच या शब्दों के बदलाव के। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी महिला, दलित या मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय हो रहा है, तो उसे स्पष्ट रूप से उसी पहचान के साथ उठाया जाना चाहिए और उसके लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए।
यह टिप्पणी उस सुझाव के संदर्भ में आई, जिसमें किसी नेता ने पार्टी को “मुस्लिम” शब्द के स्थान पर “अल्पसंख्यक” शब्द इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। राहुल गांधी ने इस विचार पर असहमति जताते हुए कहा कि वास्तविक मुद्दों को स्पष्ट रूप से नाम देना ही अधिक प्रभावी और ईमानदार राजनीतिक तरीका है।
बैठक में अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संवाद और संपर्क को और मजबूत करना चाहिए। इस बैठक में लगभग 52 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी बैठक में कहा कि पार्टी को अब आर्थिक संकट जैसे विषयों पर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अधिक गहराई से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि नीतिगत मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
वहीं, इमरान मसूद ने चुनावी रणनीति पर बात करते हुए कहा कि कांग्रेस को केवल “बीजेपी को हराने” के एजेंडे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी विचारधारा और नीतियों के आधार पर जनता से समर्थन मांगना चाहिए।
गौरतलब है कि राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने बढ़ते आर्थिक संकट, किसानों, युवाओं और छोटे व्यापारियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।













