भोपाल में ट्विशा शर्मा की रहस्यमयी मौत का मामला अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। इस केस में ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की परेशानियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के सामने यह दावा किया है कि गिरिबाला सिंह ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की। सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि ट्विशा के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जाए। इन आरोपों को उस समय और मजबूती मिली, जब पुलिस ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग नहीं कर रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया है। यह नोटिस राज्य सरकार की उस याचिका पर जारी हुआ है, जिसमें गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को करेगी।
सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस पूरे मामले में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि गिरिबाला सिंह को अत्यधिक जल्दबाजी में अग्रिम जमानत दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्विशा की मौत के कुछ घंटों के भीतर ही गिरिबाला सिंह ने कई प्रभावशाली लोगों और सीसीटीवी तकनीशियनों से संपर्क किया था। इसी आधार पर राज्य सरकार ने आशंका जताई कि वह जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने यह भी बताया कि ट्विशा शर्मा का पोस्टमॉर्टम 13 मई को भोपाल एम्स में हुआ था और उसके अगले ही दिन गिरिबाला सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि सेशंस कोर्ट ने मात्र 24 घंटे के भीतर उनकी जमानत याचिका मंजूर भी कर ली।
यह पूरा मामला 12 मई का है, जब ट्विशा शर्मा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था और उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। परिवार लगातार इस मामले में ससुराल पक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। हालांकि दूसरी ओर गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि ट्विशा को ड्रग्स लेने की आदत थी और मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब ट्विशा के पति समर्थ सिंह को जबलपुर जिला अदालत परिसर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की जांच को लेकर दबाव और बढ़ गया। बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने इस केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने का फैसला किया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी करेगी और यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई साजिश छिपी हुई थी।
इस बीच गिरिबाला सिंह ने भी अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि वह पुलिस जांच में सहयोग करना चाहती हैं और अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन भोपाल पुलिस ने उनसे अब तक कोई संपर्क नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके घर के बाहर लगातार भीड़ जमा हो रही है, जिसकी वजह से वह बाहर निकलने में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में गिरिबाला सिंह ने कहा कि वह फिलहाल घर से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दिन पहले उनके वकील को कार से कुचलने की कोशिश भी की गई थी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
अब पूरे मामले पर सभी की नजरें 25 मई को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। अदालत यह तय करेगी कि गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत बरकरार रहेगी या फिर जांच में बाधा डालने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए उसे रद्द किया जाएगा। मामले में CBI की एंट्री के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं।













