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बकरीद से पहले असम के मुस्लिम संगठनों की बड़ी पहल, गाय की कुर्बानी से परहेज की अपील; हिमंत सरमा ने की सराहना

बकरीद 2026 से पहले असम के कई मुस्लिम संगठनों ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए गाय की कुर्बानी से बचने की अपील की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भाईचारे और शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 24 May 2026 10:45:53

बकरीद से पहले असम के मुस्लिम संगठनों की बड़ी पहल, गाय की कुर्बानी से परहेज की अपील; हिमंत सरमा ने की सराहना

बकरीद से पहले असम में मुस्लिम समुदाय की ओर से एक अहम पहल देखने को मिली है, जिसकी राज्यभर में चर्चा हो रही है। ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी को लेकर हर साल अलग-अलग राज्यों में संवेदनशील माहौल बनता रहा है, खासकर गाय की कुर्बानी को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल के बीच असम के कई जिलों की ईदगाह और कब्रिस्तान कमेटियों ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी से परहेज किया जाए। इस फैसले का राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने खुलकर स्वागत किया है और इसे सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने वाला कदम बताया है।

राज्य के होजाई, धुबरी, बोंगाईगांव और उधारबंद समेत कई इलाकों की ईदगाह कमेटियों ने संयुक्त रूप से यह अपील जारी की। कमेटियों का कहना है कि समाज में शांति और आपसी भाईचारे को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया गया है कि वे बकरीद के दौरान गो-वध से बचें और ऐसे किसी कार्य से दूरी रखें जिससे दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत हों।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि असम के सनातन समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में यह एक सकारात्मक और सराहनीय प्रयास है। उन्होंने लिखा कि ऐसे स्वैच्छिक फैसले राज्य में शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता को और मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि राज्य की अन्य ईद कमेटियां भी इसी तरह की पहल करेंगी और इस बार की ईद को “गो-वध मुक्त” बनाने में सहयोग देंगी।

23 मई 2026 को जारी धुबरी टाउन ईदगाह कमेटी के आधिकारिक नोटिस में इस फैसले के पीछे कानूनी और धार्मिक दोनों पहलुओं का उल्लेख किया गया। कमेटी ने बताया कि असम में लागू मवेशी संरक्षण कानून के तहत गाय की कुर्बानी प्रतिबंधित है। राज्य में लागू Cattle Preservation Act के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने पर गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें तीन साल से लेकर सात साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है।

कमेटियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम धर्म में सिर्फ गाय की ही कुर्बानी देना अनिवार्य नहीं माना गया है। धार्मिक जानकारों के हवाले से कहा गया कि इस्लामिक परंपरा में अन्य जानवरों की कुर्बानी भी पूरी तरह मान्य है और इससे धार्मिक नियमों का उल्लंघन नहीं होता। पहले असम में गाय आसानी से उपलब्ध होने के कारण कुछ क्षेत्रों में उसकी कुर्बानी दी जाती थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों और कानूनों को देखते हुए अब वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की अपील की गई है।

इसके साथ ही कमेटियों ने सोशल मीडिया को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अपील में कहा गया है कि कुर्बानी से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो या मांस और पशुओं के अवशेषों को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जाए। यह भी कहा गया कि किसी भी तरह की ऐसी गतिविधि से बचा जाए, जिससे दूसरे समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे या सामाजिक तनाव पैदा हो।

उधर राजधानी दिल्ली में भी बकरीद को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली सरकार में मंत्री Kapil Mishra ने साफ कहा है कि राजधानी में गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित पशुओं का वध पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, रिहायशी इलाकों और अनधिकृत बाजारों में जानवरों की खरीद-बिक्री या कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी। कुर्बानी केवल निर्धारित और अधिकृत स्थानों पर ही की जा सकेगी। इसके अलावा पशुओं के अवशेष, खून या गंदगी को नालियों और सार्वजनिक स्थलों पर फेंकने पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें। बकरीद को लेकर जारी इन निर्देशों और अपीलों को प्रशासन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।

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