न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

लोकसभा पहुंचने की तैयारी में ममता बनर्जी? सांसद की सीट खाली कराने की चर्चा, पार्टी के भीतर बढ़ी हलचल

लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच ममता बनर्जी के संसद पहुंचने की संभावनाओं पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सांसद की सीट खाली कराने की अटकलों और टीएमसी के भीतर बढ़ती गतिविधियों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Fri, 05 Jun 2026 3:20:09

लोकसभा पहुंचने की तैयारी में ममता बनर्जी? सांसद की सीट खाली कराने की चर्चा, पार्टी के भीतर बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के हवाले से ऐसी अटकलें तेज हैं कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संसद की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए वह लोकसभा का रास्ता तलाश रही हैं और पार्टी के भीतर संभावित उपचुनाव को लेकर मंथन चल रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता बनर्जी की नजर मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर लोकसभा सीट पर है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वहां से सांसद बने पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस नेता यूसुफ पठान से सीट खाली करने की संभावना पर बातचीत की थी। हालांकि सूत्रों का दावा है कि यूसुफ पठान ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिससे ममता की रणनीति को झटका लग सकता है।

यूसुफ पठान के रुख ने बढ़ाई मुश्किलें

जानकारी के अनुसार ममता बनर्जी चाहती हैं कि लोकसभा में प्रवेश के लिए किसी सुरक्षित सीट पर उपचुनाव कराया जाए। इसके लिए बहरामपुर सीट को संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन यूसुफ पठान के कथित तौर पर इस्तीफा देने से मना करने के बाद यह योजना आसान नहीं दिखाई दे रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि किसी सांसद की सीट खाली नहीं होती तो ममता के लिए लोकसभा पहुंचने का रास्ता और जटिल हो सकता है। ऐसे में पार्टी के भीतर अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

हुमायूं कबीर ने दिया खुला प्रस्ताव

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के सामने एक नया विकल्प रखा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि यदि पार्टी नेतृत्व चाहे तो वह अपनी रेजीनगर सीट ममता बनर्जी के लिए छोड़ने को तैयार हैं।

हुमायूं कबीर का कहना है कि उनकी इच्छा राज्य की राजनीति में सक्रिय बने रहने की है और यदि ममता बनर्जी को किसी सीट की आवश्यकता होती है तो वह सहयोग करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि उन्होंने पिछले चुनाव में दो विधानसभा सीटों से जीत दर्ज की थी, जिनमें रेजीनगर भी शामिल है।

चुनावी झटकों के बाद नई रणनीति पर काम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने तृणमूल कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कई विधायक नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दर्जनों विधायक अलग रुख अपनाने की तैयारी में हैं। यही वजह मानी जा रही है कि ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी उपस्थिति और मजबूत करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।

पार्टी में बढ़ती असहमति बनी चिंता

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। खबरें हैं कि कई विधायकों ने संगठनात्मक फैसलों को लेकर अलग राय व्यक्त की है। इससे पार्टी नेतृत्व के सामने एकता बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष का दायरा बढ़ता है तो इसका असर पार्टी की भविष्य की रणनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में ममता बनर्जी का लोकसभा की ओर रुख करना एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सांसद बनने के लिए क्या है प्रक्रिया?

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार यदि ममता बनर्जी लोकसभा सदस्य बनना चाहती हैं तो उन्हें चुनाव जीतना होगा। इसके लिए पहले किसी मौजूदा सांसद को अपनी सीट छोड़नी होगी, जिसके बाद वहां उपचुनाव कराया जाएगा। उसी उपचुनाव में जीत हासिल करके वह संसद पहुंच सकती हैं।

हालांकि यह प्रक्रिया जितनी आसान दिखाई देती है, राजनीतिक रूप से उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। सीट खाली कराना, उपचुनाव कराना और फिर जीत सुनिश्चित करना—इन सभी चरणों में कई राजनीतिक समीकरण काम करते हैं।

आसान नहीं होगी चुनावी राह

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बहरामपुर जैसी सीट पर जीत दर्ज करना ममता बनर्जी के लिए सरल नहीं होगा। पिछले कुछ चुनावों में उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है और विपक्षी दल भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी लंबे समय से इस इलाके में प्रभाव रखते हैं और उन्हें मजबूत चुनौतीकर्ता माना जाता है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए प्रभावशाली उम्मीदवार उतार सकती है।

कई चुनौतियों के बीच लोकसभा की राह

2026 के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य में ममता बनर्जी के सामने संगठनात्मक और चुनावी दोनों तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। यदि वह लोकसभा का चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं तो उन्हें न केवल सीट के चयन पर रणनीतिक फैसला लेना होगा, बल्कि विपक्षी दलों की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा।

फिलहाल पार्टी की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ममता बनर्जी वास्तव में लोकसभा का रुख करती हैं और इसके लिए पार्टी कौन सा रास्ता चुनती है।

राज्य
View More

Shorts see more

रोज़ सुबह पिएं सूखे आंवले और जीरे का पानी, शरीर में होंगे ये 6 चमत्कारी बदलाव!

रोज़ सुबह पिएं सूखे आंवले और जीरे का पानी, शरीर में होंगे ये 6 चमत्कारी बदलाव!

  • आंवला-जीरा पानी पाचन और इम्यूनिटी बढ़ाता है
  • आंवला में विटामिन C होता है
  • जीरे में आयरन और कैल्शियम है
read more

ताजा खबरें
View More

PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत