
देशभर में 7 मार्च से घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तंज कसते हुए लिखा, “जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई।” गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के तुरंत बाद दिया गया उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। महंगाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है और इसे आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ने से जोड़कर देख रहा है।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर दोनों हुए महंगे
नई कीमतों के अनुसार, देशभर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां यह सिलेंडर करीब 853 रुपये में मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर लगभग 913 रुपये हो गई है। यह नई दरें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं।
केवल घरेलू गैस ही नहीं, बल्कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि की गई है। अब यह सिलेंडर करीब 1883 रुपये में उपलब्ध होगा। गैस सिलेंडर की कीमतों में यह बदलाव अप्रैल 2025 के बाद पहली बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया के तनाव का असर
विशेषज्ञों के अनुसार गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आने वाली तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति पर असर पड़ने से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
इसी के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड ने कुछ ग्राहकों के लिए गैस आपूर्ति कम करने की योजना बनाई है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि उसके एक एलएनजी सप्लायर ने ‘फोर्स मेज्योर’ यानी अपरिहार्य परिस्थितियों का नोटिस जारी किया है।
आपूर्ति में बाधा की चेतावनी
‘फोर्स मेज्योर’ नोटिस का मतलब यह होता है कि अनुबंध में तय दायित्वों को असाधारण और नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण पूरा करना संभव नहीं है। ऐसे में आपूर्ति में कटौती की स्थिति बन सकती है।
बताया जा रहा है कि ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की खबरों के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के कई देशों के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता माना जाता है। युद्ध जैसी स्थिति के कारण इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ भारत में भी महसूस किया जा रहा है।













