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राहुल गांधी के ‘प्रयोग’ पर BJP का तीखा हमला, बोली—नाटक से नहीं मिलेगा फायदा; राजस्थान में फिर सरकार बनने का दावा

पुष्कर चिंतन शिविर में राहुल गांधी के ‘इंटरैक्टिव प्रयोग’ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने इसे नाटक बताते हुए हमला बोला और राजस्थान में फिर सरकार बनने का दावा किया, जबकि कांग्रेस ने इसे संगठनात्मक प्रशिक्षण का हिस्सा बताया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 02 Jun 2026 4:01:16

राहुल गांधी के ‘प्रयोग’ पर BJP का तीखा हमला, बोली—नाटक से नहीं मिलेगा फायदा; राजस्थान में फिर सरकार बनने का दावा

पुष्कर में आयोजित कांग्रेस के चिंतन शिविर के दौरान राहुल गांधी द्वारा किए गए एक अनोखे ‘इंटरैक्टिव प्रयोग’ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद नेताओं को अलग-अलग भूमिकाओं में रखकर संगठन के भीतर शक्ति संतुलन और व्यवहारिक राजनीति को समझाने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कुछ नेताओं को टिकट चाहने वालों की भूमिका दी, जो प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के इर्द-गिर्द घूमते नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी दर्शाने की कोशिश की कि सत्ता और पद की लालसा में किस तरह नेता झुकते और बदलते हैं। इसी क्रम में डोटासरा को एक प्रतीकात्मक मुद्रा में कुर्सी पर आशीर्वाद देते हुए खड़ा कराया गया, जबकि कुछ नेताओं को उनके सामने अभिवादन या चापलूसी जैसी भूमिका निभाने को कहा गया। बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री रामलाल जाट से प्रतीकात्मक रूप से कुर्सी खींचने का दृश्य भी कराया गया, ताकि आपसी खींचतान और अंदरूनी प्रतिस्पर्धा को दर्शाया जा सके। कांग्रेस इसे संगठनात्मक समझ और संवाद की नई शैली बता रही है, लेकिन भाजपा ने इसे सीधे तौर पर ‘राजनीतिक नाटक’ करार दिया है।

BJP का तीखा पलटवार: “ड्रामा से कुछ नहीं बदलेगा”

राजस्थान सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने राहुल गांधी के इस पूरे आयोजन को ‘नौटंकी’ बताते हुए कहा कि इससे जनता पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में भाजपा सरकार का काम और सुशासन लोगों को पसंद आ रहा है और आने वाले समय में पार्टी फिर से सत्ता में वापसी करेगी।

अविनाश गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के चिंतन शिविर में इस तरह के ‘ड्रामे’ करने से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने राहुल गांधी के दौरे को पूरी तरह प्रचारात्मक करार देते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करना कांग्रेस की पुरानी आदत है और यह सिर्फ दिखावा है।

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी को राजनीतिक गंभीरता से नहीं लिया जाता और उनका व्यवहार कई बार संसद में भी विवाद का कारण बन चुका है। उनके अनुसार, ऐसे नेता को रोल मॉडल मानना मुश्किल है क्योंकि उनमें अनुशासन की कमी दिखाई देती है।

BJP युवा मोर्चा का हमला: “कांग्रेस प्रयोगों से कमजोर हुई”

भाजपा युवा मोर्चा के राजस्थान अध्यक्ष शंकर गोरा ने भी राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पूरा संदेश केवल चिंतन शिविर तक सीमित रह जाएगा और जमीनी राजनीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

शंकर गोरा ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी अक्सर विदेश यात्राओं में समय बिताते हैं और ऐसे ‘प्रयोग’ करके कांग्रेस को मजबूत करने के बजाय और कमजोर कर देते हैं। उनके अनुसार, राजनीति को समझने के लिए अनुभव और समर्पण जरूरी है, जो कांग्रेस नेतृत्व में कमी के रूप में दिखाई देता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लगातार चुनावी हारें कांग्रेस की वास्तविक स्थिति को दर्शाती हैं और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के नतीजे इसका ताजा उदाहरण हैं। भाजपा नेता ने कहा कि इस तरह के ‘नाटकीय प्रयोगों’ से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।

डोटासरा का जवाब: “संदेश को गलत तरीके से समझा गया”

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष राहुल गांधी के संदेश को समझने में पूरी तरह विफल रहा है।

डोटासरा ने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य यह समझाना था कि सत्ता या पद किसी व्यक्ति की पूजा से नहीं मिलता, बल्कि जनता के काम करने से हासिल होता है। उन्होंने कहा कि कुर्सी किसी नेता की कृपा से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मिलती है।

उनके अनुसार, राहुल गांधी का संदेश स्पष्ट था कि संगठन में सेवा और समर्पण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि व्यक्तिगत प्रभाव या चापलूसी को।

संगठन प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी का संदेश

पुष्कर में आयोजित यह कार्यक्रम कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नवनियुक्त जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण से भी जुड़ा था। इस 10 दिवसीय शिविर में राजस्थान और दिल्ली के 64 नए जिला अध्यक्षों को पार्टी की संगठनात्मक कार्यशैली और रणनीति की ट्रेनिंग दी गई।

कार्यक्रम के अंतिम दिन राहुल गांधी स्वयं शिविर में पहुंचे और सभी नवनियुक्त जिला अध्यक्षों से संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन, तपस्या और समर्पण की अवधारणा पर जोर दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि जिस तरह भगवान शिव तपस्या का प्रतीक हैं, उसी तरह कांग्रेस को भी त्याग और मेहनत के मार्ग पर चलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा कि त्याग और सेवा कांग्रेस की मूल परंपरा रही है और आगे भी रहनी चाहिए।

साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भाजपा जहां ‘पूजा और प्रतीकवाद’ पर जोर देती है, वहीं कांग्रेस को जमीनी मेहनत और संगठनात्मक अनुशासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

बढ़ती सियासी बहस और अलग-अलग व्याख्याएं

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर कांग्रेस इसे संगठन सुधार और नेतृत्व प्रशिक्षण का हिस्सा बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रही है।

अब यह मुद्दा केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘प्रयोग’ की राजनीतिक व्याख्या किस दिशा में जाती है और इसका असर जमीनी राजनीति पर कितना पड़ता है।

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