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बच्चों में क्यों तेजी से बढ़ रहे सफेद दाग के मामले? किन हिस्सों पर सबसे पहले दिखते हैं शुरुआती संकेत, जानें डॉक्टर की राय

बच्चों में तेजी से बढ़ते विटिलिगो यानी सफेद दाग के मामलों के पीछे कारण क्या हैं? जानें शुरुआती लक्षण, प्रभावित हिस्से और डॉक्टरों की राय। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह ऑटोइम्यून स्थिति कैसे होती है और समय रहते इसका प्रबंधन कैसे किया जा सकता है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 04 Jun 2026 11:08:29

बच्चों में क्यों तेजी से बढ़ रहे सफेद दाग के मामले? किन हिस्सों पर सबसे पहले दिखते हैं शुरुआती संकेत, जानें डॉक्टर की राय

आज के समय में बच्चों में त्वचा से जुड़ी एक स्थिति जिसे आमतौर पर “सफेद दाग” या विटिलिगो कहा जाता है, तेजी से देखने को मिल रही है। 10–12 साल तक की उम्र के बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं, जिससे कई बार समाज में गलत धारणाएं और मानसिक तनाव जैसी स्थिति बन जाती है। हालांकि मेडिकल साइंस के अनुसार विटिलिगो को बीमारी नहीं बल्कि एक ऑटोइम्यून कंडीशन माना जाता है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम त्वचा की कोशिकाओं पर ही असर डालने लगता है।

दिल्ली की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. चांदनी जैन गुप्ता के अनुसार, लोगों में इस स्थिति को लेकर जागरूकता अभी भी कम है, जबकि यह कोई संक्रामक या खतरनाक रोग नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि बच्चों में यह समस्या क्यों बढ़ रही है और इसके शुरुआती संकेत किन जगहों पर दिखाई देते हैं।

विटिलिगो क्या है और यह कैसे होता है?

चिकित्सकीय भाषा में विटिलिगो उस स्थिति को कहा जाता है जब त्वचा का रंग तय करने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मेलानोसाइट्स (Melanocytes) कहा जाता है, या तो नष्ट हो जाती हैं या अपना काम करना बंद कर देती हैं। इसके कारण शरीर के कुछ हिस्सों की त्वचा का रंग धीरे-धीरे सफेद होने लगता है।

इस स्थिति में न तो दर्द होता है और न ही जलन, लेकिन त्वचा के रंग में असमानता स्पष्ट दिखाई देने लगती है। कई बार यह बदलाव छोटे धब्बों से शुरू होकर धीरे-धीरे फैलता है। हालांकि यह शारीरिक रूप से गंभीर नहीं माना जाता, लेकिन इसका मानसिक और सामाजिक प्रभाव मरीज पर काफी गहरा हो सकता है।

बच्चों में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में विटिलिगो के मामलों में वृद्धि के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। आधुनिक जीवनशैली, गलत खान-पान और पोषण की कमी इसका प्रमुख कारण माने जाते हैं। असंतुलित डाइट और बाहर का अधिक तला-भुना भोजन भी त्वचा की सेहत पर असर डाल सकता है।

इसके अलावा शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी जैसे विटामिन B12, विटामिन D, जिंक और कॉपर की कमी भी इस स्थिति को प्रभावित कर सकती है। कई बार यह समस्या किसी हल्के स्किन इंफेक्शन या शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया के कारण भी शुरू हो सकती है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बच्चों में बढ़ता तनाव और मानसिक दबाव भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकता है, जिससे ऐसी त्वचा संबंधी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

शुरुआती लक्षण किन जगहों पर दिखते हैं?

विटिलिगो की शुरुआत अक्सर छोटे सफेद धब्बों से होती है, जो धीरे-धीरे फैल सकते हैं। शुरुआती चरण में ये धब्बे हल्के और कम स्पष्ट होते हैं, लेकिन समय के साथ इनका रंग पूरी तरह सफेद हो सकता है।

यह दाग आमतौर पर उन हिस्सों पर दिखाई देते हैं जो धूप के संपर्क में ज्यादा आते हैं, जैसे चेहरा, होंठ, आंखों के आसपास की त्वचा, हाथों की उंगलियां, कलाई, कोहनी, घुटने और पैर। कुछ मामलों में शुरुआत में हल्की खुजली या त्वचा का रूखापन भी महसूस हो सकता है, हालांकि यह हर मरीज में जरूरी नहीं होता।

इलाज और मैनेजमेंट कैसे किया जाता है?

विटिलिगो का उपचार हर मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। यह इस बात पर आधारित होता है कि दाग कितने फैले हैं और शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित कर रहे हैं। शुरुआती अवस्था में इलाज ज्यादा प्रभावी माना जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार स्टेरॉइड क्रीम, इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने वाली दवाएं और फोटोथेरेपी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में नैनो-यूवीबी (Nano-UVB) लाइट थेरेपी के जरिए त्वचा के रंग को संतुलित करने की कोशिश की जाती है।

बच्चों की देखभाल और बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि विटिलिगो से पीड़ित बच्चों को विशेष देखभाल और मानसिक सहयोग की जरूरत होती है। कुछ सावधानियां अपनाकर स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

- धूप में निकलते समय त्वचा को ढकना और ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग करना
- विटामिन B12, C और D से भरपूर संतुलित आहार लेना
- तनाव को कम करना और योग या हल्की शारीरिक गतिविधियों को अपनाना
- भारी केमिकल युक्त मेकअप या घरेलू नुस्खों का बिना सलाह उपयोग न करना

डॉक्टरों की सलाह है कि अगर बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। यह स्थिति छूने से नहीं फैलती और न ही यह कोई संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसे लेकर घबराने के बजाय सही जानकारी और समय पर इलाज जरूरी है।

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