
भरतपुर/डीग। गुरु-शिष्य परंपरा की महान विरासत वाले पर्व गुरु पूर्णिमा पर गुरुवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने धार्मिक श्रद्धा और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने डीग जिले के पूंछरी गांव स्थित प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। उन्होंने भगवान श्रीनाथजी का जलाभिषेक कर विशेष पूजा संपन्न की और संतों का शॉल व पुष्पमालाओं से सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री सुबह मंदिर पहुंचे जहां मुख्य पुजारी और मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। श्रीनाथजी के दर्शन के बाद सीएम भजनलाल ने प्रदेश की सुख-समृद्धि, किसानों के कल्याण, समाज में समरसता और जनता की भलाई के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर के मुख्य पुजारी और अन्य संतों को पारंपरिक सम्मान स्वरूप शॉल, माला और वस्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
हनुमान मंदिर में भी की पूजा, जनता से की मुलाकात
श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री का काफिला भरतपुर जिले के लुधावई गांव पहुंचा। यहां उन्होंने प्राचीन हनुमान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और आरती में भाग लिया। मंदिर परिसर में उपस्थित साधु-संतों को उन्होंने वस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। संतों ने उन्हें प्रदेश के लोककल्याण के लिए शुभाशीष दिया।
लुधावई प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से संवाद भी किया। उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत समाधान की दिशा में कदम उठाएं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनसेवा और धर्म दोनों उनके शासन के केंद्र में हैं।
इस धार्मिक आयोजन के दौरान गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, भरतपुर जिला प्रमुख, अनेक विधायक, पंचायत समिति के प्रतिनिधि, नगर निकायों के जनप्रतिनिधि तथा भाजपा के कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। पूरे आयोजन को संयम, अनुशासन और भक्ति भावना के साथ संपन्न किया गया।
धौलपुर में भी उमड़ा आस्था का सैलाब
इधर धौलपुर जिले में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न आश्रमों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। विशेष रूप से हनुमानगढ़ कैथरी आश्रम में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। महंत शांति दास महाराज ने गुरु की महिमा पर प्रवचन करते हुए कहा कि “गुरु ही संसार रूपी भवसागर से पार लगाने की क्षमता रखते हैं। वे जीव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।”
आश्रमों में गुरु दीक्षा समारोह के साथ विशाल भंडारे भी आयोजित किए गए, जहां भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और गुरुजनों का चरणवंदन कर पुण्य अर्जित किया।
श्रद्धा, संस्कृति और सेवा का संगम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह धार्मिक दौरा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनआस्था और परंपरा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक था। गुरु पूर्णिमा जैसे पवित्र अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री का संतों के चरणों में जाकर आशीर्वाद लेना और जनता से सीधे संवाद करना एक भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव की मिसाल बना। ऐसे आयोजनों से न केवल परंपराओं को संरक्षण मिलता है, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच विश्वास की डोर भी मजबूत होती है।














