
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर समझौते के बाद पेंटागन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस अवसर पर हेगसेथ ने जोरदार बयान देते हुए कहा कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी एक ऐतिहासिक सफलता है और ईरान खुद को बचाने में असमर्थ साबित हुआ।” उनके अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के लिए भीख माँगी थी, जबकि उसकी सेना अब लंबे समय तक लड़ने में असमर्थ है।
'ईरान की सैन्य शक्ति पर भारी प्रहार'
पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने सिर्फ 10 प्रतिशत अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करते हुए, दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक को लगभग तबाह कर दिया। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली अभियान ने हर लक्ष्य को तय समय पर हासिल किया, जिससे ईरान की सैन्य क्षमताओं पर गंभीर असर पड़ा है।
#WATCH | Washington, DC | United States Secretary of War, Pete Hegseth, says, "...President Trump forged this moment. Iran begged for this ceasefire, and we all know it...Operation Epic Fury was a historic and overwhelming victory on the battlefield...Operation Epic Fury… pic.twitter.com/dUSLl6FUvX
— ANI (@ANI) April 8, 2026
'ईरान का मिसाइल और नौसैनिक कार्यक्रम नष्ट'
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, “ईरान की नौसेना अब समुद्र में सीमित हो चुकी है और उसके पास कोई प्रभावी हवाई रक्षा प्रणाली नहीं है। उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है। हमने उसके रक्षा औद्योगिक आधार को भी बुरी तरह तहस-नहस कर दिया।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब ईरान नई मिसाइलें बनाने में सक्षम नहीं होगा।
'तेहरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे'
हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। उन्होंने बताया कि ईरान की सरकार ने वास्तविक स्थिति को समझते हुए समझौते पर हस्ताक्षर किया, क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों में मारे गए कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के नाम भी गिनाए।
'सीजफायर केवल अस्थायी विराम'
जनरल डैन केन ने कहा कि सीजफायर केवल एक विराम है, और यदि आदेश मिलेगा तो अमेरिकी सेना फिर से पूरी तैयारी के साथ कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान में 13,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया, और ईरान के 80 प्रतिशत हवाई रक्षा सिस्टम, 90 प्रतिशत पारंपरिक नौसेना बेड़े और 90 प्रतिशत हथियार फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया।













