
राजस्थान पुलिस ने राज्य के इतिहास में पहली बार फिंगर प्रिंट की मदद से नकबजनी के एक मामले को सुलझाने में सफलता पाई है। यह मामला जयपुर ग्रामीण के जोबनेर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां जनवरी 2025 में एक घर में कीमती सामान की चोरी हुई थी। पुलिस की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के चलते आरोपियों की पहचान हुई, जिनमें से एक पहले से बीकानेर जेल में बंद था।
जोबनेर में हुई थी वारदात, चोर ले गए थे लाखों का माल
24 जनवरी 2025 की रात जोबनेर के गणेश विहार कॉलोनी में एक मकान में नकबजनी की वारदात हुई थी। पीड़ित परिवार ने बताया कि चोर सोने-चांदी के जेवर, नकदी और अन्य कीमती सामान चुरा ले गए। वारदात की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वैज्ञानिक तरीकों से जांच शुरू की।
फिंगर प्रिंट से खुली गुत्थी, रोशन मीणा चढ़ा पुलिस के हत्थे
पुलिस ने मौके से फिंगर प्रिंट लिए और उन्हें अपने रिकॉर्ड में दर्ज पुराने चिह्नित फिंगर प्रिंट्स से मिलान किया। इसमें एक फिंगर प्रिंट सीकर जिले के जाजोद निवासी रोशन मीणा से मैच हुआ, जो उस समय बीकानेर जेल में एटीएम लूट के मामले में बंद था। पुलिस ने उसे प्रॉडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया और पूछताछ में उसने जोबनेर की नकबजनी में अपनी संलिप्तता कबूल कर ली।
दूसरा आरोपी नीमकाथाना जेल से पकड़ा गया
रोशन मीणा की निशानदेही पर पुलिस ने उसके साथी हजारीलाल मीणा को भी नीमकाथाना जेल से प्रॉडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। हजारीलाल जोबनेर क्षेत्र में स्थित अपने ससुराल में शादी का कार्ड देने के बहाने आया था और इसी दौरान उसने रेकी कर वारदात की योजना बनाई थी।
शादी के बहाने आए, लौटते समय की रेकी
जोबनेर थानाधिकारी सुशील के अनुसार दोनों आरोपी शादी के कार्ड देने के बहाने आए थे, लेकिन असल मंशा इलाके की रेकी करना थी। वे वारदात से कुछ दिन पहले यहां आए और फिर 24 जनवरी की रात सीकर से अपने अन्य साथियों के साथ आकर चोरी को अंजाम दिया। दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से एक-एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।
आईजी बोले: फिंगर प्रिंट से पहली बार पकड़े नकबजन
जयपुर रेंज आईजी अजयपाल लांबा ने बताया कि राजस्थान में यह पहला मामला है, जहां सिर्फ फिंगर प्रिंट की मदद से नकबजनी की गुत्थी सुलझाई गई। घटना स्थल से मिले फिंगर प्रिंट आरोपी के पुराने रिकॉर्ड से मैच होने पर पुलिस को उनकी पहचान में बड़ी सफलता मिली। उन्होंने इसे वैज्ञानिक अपराध जांच की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
जोबनेर की इस नकबजनी के खुलासे ने न केवल आरोपियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि फॉरेंसिक तकनीकें अब राजस्थान पुलिस की अपराध नियंत्रण में अहम भूमिका निभा रही हैं। फिंगर प्रिंट जैसी तकनीकी साक्ष्य प्रणाली अब ग्रामीण स्तर की वारदातों में भी कारगर साबित हो रही है। यह सफलता भविष्य में अपराधियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगी।














