
जयपुर। राजस्थान में ऊर्जा संकट की आशंका उस समय गहरा गई जब कोयला मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ की खदानों से छबड़ा थर्मल पावर प्लांट को कोयला आपूर्ति जारी रखने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। यह फैसला राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन) के बीच हुए जॉइंट वेंचर की जटिलताओं के चलते लिया गया है।
कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से यह कह दिया है कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) और नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) के तहत बनी नई इकाई को छत्तीसगढ़ की खदानों से कोयला नहीं दिया जा सकता।
जॉइंट वेंचर में एनटीपीसी को मिली प्रशासनिक कमान
छबड़ा प्लांट को लेकर राजस्थान उत्पादन निगम और एनटीपीसी के बीच एक संयुक्त उपक्रम की स्थापना की गई थी, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एनटीपीसी को सौंपी गई। इस समझौते के बाद प्लांट का प्रबंधन और नियंत्रण एनटीपीसी के हाथों में चला गया। अब इस जॉइंट वेंचर के तहत एक नई कंपनी का गठन प्रस्तावित है। यहीं से समस्या शुरू होती है।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ की परसा कांटा और ईस्ट बेसिन कोयला खदानों का आवंटन विशेष रूप से राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को किया गया था। ऐसे में जब प्लांट का संचालन और स्वामित्व किसी नई इकाई को सौंपा जा रहा है, तो उस कंपनी को इन खदानों से कोयले की आपूर्ति नहीं दी जा सकती, क्योंकि उसका नाम आवंटन शर्तों में शामिल नहीं है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया – नियम नहीं बदले जा सकते
कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों में इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कोयले की आपूर्ति नई कंपनी को सीधे की जा सके। इसलिए उत्पादन निगम का अनुरोध खारिज कर दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि केवल उसी संस्था को कोयला दिया जा सकता है, जिसके नाम पर आवंटन हुआ था।
ऊर्जा विभाग में मचा हड़कंप, जल्द होगी दिल्ली में बैठक
कोयला मंत्रालय की सख्ती के बाद राजस्थान ऊर्जा विभाग और उत्पादन निगम में चिंता की लहर दौड़ गई है। यह फैसला सीधे-सीधे छबड़ा प्लांट की भविष्य की कोयला आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उत्पादन निगम ने स्थिति को संभालने के लिए कोयला मंत्रालय के अधिकारियों से दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य स्थायी समाधान तलाशना और कोयला आपूर्ति बाधित न होने देना है।
फिलहाल जारी रहेगी आपूर्ति, लेकिन समय सीमित
हालांकि जब तक नई कंपनी का विधिवत गठन नहीं हो जाता, तब तक उत्पादन निगम के नाम पर कोयला आपूर्ति जारी रहेगी। छत्तीसगढ़ की परसा कांटा और ईस्ट बेसिन खदानों से फिलहाल हर साल 70 लाख टन कोयला छबड़ा प्लांट को मिल रहा है। लेकिन जैसे ही नई इकाई अस्तित्व में आती है, वर्तमान स्वरूप में आपूर्ति बंद हो सकती है, यदि मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिलती है।
ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट राजस्थान की विद्युत जरूरतों का एक प्रमुख स्रोत है। यदि कोयला आपूर्ति में रुकावट आती है, तो राज्य की बिजली आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, विशेषकर मानसून के बाद की बढ़ती मांग के दौरान। ऐसे में सभी पक्षों की निगाहें कोयला मंत्रालय के अगले कदम और प्रस्तावित बैठक पर टिकी हुई हैं।
छत्तीसगढ़ की खदानों से कोयला आपूर्ति को लेकर उपजे इस विवाद ने राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एनटीपीसी के साथ जॉइंट वेंचर के बाद बना यह पेचीदा मामला आने वाले दिनों में राज्य के लिए बिजली संकट का कारण बन सकता है, यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया।














