हरियाणा के फरीदाबाद में जेवर एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के दौरान गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया। फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर काम कर रही एक भारी-भरकम क्रेन अचानक असंतुलित होकर गिर गई, जिसके नीचे कई मजदूर दब गए। इस दुर्घटना में अब तक तीन श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
हादसे के बाद पूरे निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद मजदूरों और कर्मचारियों के बीच चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। कई घंटों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद दबे हुए मजदूरों को बाहर निकाला गया।
गार्डर उठाने के दौरान बिगड़ा संतुलन
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटना उस समय हुई जब फ्लाईओवर निर्माण कार्य के लिए क्रेन की मदद से भारी गार्डर को उठाया जा रहा था। इसी दौरान क्रेन अचानक अपना संतुलन खो बैठी और देखते ही देखते जमीन पर पलट गई। हादसा इतना तेज था कि आसपास काम कर रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना के वक्त कुल सात मजदूर निर्माण स्थल पर मौजूद थे। इनमें से चार मजदूर सीधे क्रेन की चपेट में आ गए और उसके नीचे दब गए। बाकी मजदूरों ने तुरंत शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद राहत कार्य शुरू किया गया।
बारिश के बाद कीचड़ बना हादसे की वजह!
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ समय से हो रही बारिश के कारण निर्माण स्थल पर काफी कीचड़ जमा हो गया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से क्रेन का आधार कमजोर पड़ गया और उसका संतुलन बिगड़ गया। जैसे ही भारी गार्डर को उठाने की प्रक्रिया शुरू हुई, क्रेन का भार नियंत्रण से बाहर हो गया और वह पलट गई।
हालांकि दुर्घटना के सही कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस और स्थानीय लोगों ने चलाया बचाव अभियान
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में सक्रिय सहयोग दिया। भारी मशीनरी और अन्य उपकरणों की मदद से क्रेन के नीचे फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिश की गई।
बचाव अभियान के दौरान हालात काफी चुनौतीपूर्ण बने रहे क्योंकि क्रेन का वजन बेहद ज्यादा था। इसके बावजूद पुलिस और राहतकर्मियों ने लगातार प्रयास जारी रखा और सभी दबे हुए लोगों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
SDRF टीम ने संभाला मोर्चा
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम भी सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच गई। SDRF के एएसआई अमरजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार शाम घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद उनकी टीम मौके के लिए रवाना हुई थी।
उन्होंने बताया कि बचाव दल को कुल चार पीड़ित मिले थे। इनमें से एक मजदूर जीवित अवस्था में मिला, जिसके कंधे पर गंभीर चोटें थीं। टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार चल रहा है।
वहीं अन्य तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। उनके शवों को भी सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद पूरे क्षेत्र की दोबारा जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य व्यक्ति मलबे या क्रेन के नीचे फंसा न रह गया हो।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद क्षेत्र किया गया खाली
SDRF अधिकारियों के अनुसार सभी पीड़ितों को निकालने के बाद निर्माण स्थल को पूरी तरह खाली करा दिया गया। आसपास मौजूद कंटेनर और अन्य अवरोधों को भी हटाया गया ताकि किसी तरह का खतरा बाकी न रहे।
फिलहाल प्रशासन दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














