पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद ईरान और अमेरिका के बीच टकराव फिर तेज हो गया है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार शनिवार देर रात से लेकर रविवार सुबह तक देश के कई शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसी घटनाक्रम के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा कर दी। वहीं अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान ने साइप्रस के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला किया, जिसमें एक चालक दल का सदस्य लापता हो गया। इस घटना के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है।
अमेरिका का दावा- ईरान को अब जवाब भुगतना होगा
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ताजा घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए कहा कि IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे साइप्रस के ध्वज वाले व्यापारी जहाज M/V GFS Galaxy को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक हमला उस समय हुआ, जब जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल रहा था। इस हमले में जहाज पर मौजूद एक क्रू मेंबर लापता हो गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी CENTCOM के बयान में कहा गया कि स्थानीय समयानुसार शाम 7:15 बजे ईरान के खिलाफ इस सप्ताह की तीसरी सैन्य कार्रवाई शुरू की गई। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज से गुजर रहे जहाज पर हुए हमले के जवाब में की गई। इसके कुछ ही समय बाद ईरानी मीडिया ने बुशहर, असालुयेह और जास्क जैसे कई शहरों में विस्फोटों की खबरें प्रसारित कीं, जिससे क्षेत्र में संघर्ष और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
IRGC ने दी पलटवार की खुली चेतावनी
लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भी अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। IRGC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यदि ईरान के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो उसका करारा और व्यापक जवाब दिया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी ताकतें मौजूदा हालात का फायदा उठाकर ईरान पर हमला करने की कोशिश करती हैं, तो पश्चिम एशिया में मौजूद उनके सभी महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
साइप्रस के जहाज पर हुए कथित हमले को लेकर IRGC का कहना है कि संबंधित पोत बिना आवश्यक अनुमति के प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहा था। ईरान का दावा है कि पहले जहाज को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जहाज पर क्रूज मिसाइल से हमला किया गया था।
ट्रंप की चेतावनी के बाद और बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह टकराव ऐसे समय सामने आया है, जब शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया था। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका ने एक हजार से अधिक मिसाइलें ईरान की ओर तैनात कर रखी हैं और यदि तेहरान उनकी हत्या की किसी भी साजिश में शामिल पाया गया, तो उसे भीषण बमबारी का सामना करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तनाव की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और वहां जहाजों की निर्बाध आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास है। अमेरिका चाहता है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सभी अंतरराष्ट्रीय जहाज बिना किसी बाधा के गुजर सकें, जबकि ईरान सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। IRGC पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जब तक पश्चिम एशिया में अमेरिकी हस्तक्षेप समाप्त नहीं होता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट से किसी भी जहाज को स्वतंत्र रूप से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर सर्विस फीस की तैयारी
उधर, युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी भी कर रहा है। पहले यह समुद्री मार्ग सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहता था, लेकिन अब तेहरान सुरक्षा के नाम पर जहाजों से एक विशेष शुल्क लेने की योजना बना रहा है। ईरान इसे टैक्स नहीं बल्कि "सर्विस फीस" बता रहा है।
ईरान का कहना है कि यह शुल्क देने वाले जहाजों को उसकी ओर से सुरक्षा गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी। चीन में तैनात ईरानी राजदूत ने भी इस योजना की पुष्टि करते हुए बताया कि तेहरान इस प्रस्ताव पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है और जल्द ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस संभावित कदम को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













