नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि कथित रूप से गड़बड़ी का पैसा सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचा। इसके बावजूद उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामला वर्षों से चल रहा था तो सरकार और शीर्ष स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए कई गंभीर आरोप
गुरुवार को दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे, जमीन खरीद और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से अब तक जमीन सौदों में गड़बड़ी, चढ़ावे के प्रबंधन में भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन मांगने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
केजरीवाल ने कहा कि अब सार्वजनिक स्तर पर भी यह चर्चा है कि चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी या केवल छोटे स्तर के लोगों पर ही कार्रवाई सीमित रहेगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन देश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में मुख्य जिम्मेदार लोगों तक जांच पहुंचेगी।
ट्रस्ट के गठन और जिम्मेदारी को लेकर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास यह कहने का कोई सबूत नहीं है कि कथित धन प्रधानमंत्री तक पहुंचा, इसलिए वह ऐसा आरोप नहीं लगा रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे मामले को दबाने और संबंधित लोगों को संरक्षण देने का प्रयास किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ और ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर नियुक्त लोगों का चयन भी शीर्ष स्तर पर हुआ। केजरीवाल ने कहा कि जब नेतृत्व स्तर पर नियुक्तियां हुई हैं तो फिर इतने लंबे समय तक सामने आती रही शिकायतों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
जमीन खरीद के पुराने मामलों का भी किया उल्लेख
अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2021 में सामने आए कथित जमीन खरीद विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मीडिया में कई रिपोर्टें आई थीं। उन्होंने दावा किया कि एक जमीन का सौदा कुछ ही मिनटों के भीतर कई गुना अधिक कीमत पर मंदिर ट्रस्ट को बेचे जाने का मामला चर्चा में रहा था।
उन्होंने कहा कि जब ऐसे मामले सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे थे तो यह सवाल स्वाभाविक है कि संबंधित एजेंसियों या सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। उनके अनुसार यदि शुरुआती स्तर पर जांच होती तो बाद में इतने बड़े विवाद की स्थिति शायद नहीं बनती।
निर्माण कार्य और सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी लगाए आरोप
केजरीवाल ने मंदिर निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ इंजीनियरों ने आरोप लगाए थे कि निर्माण से जुड़े ठेकों में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग की जाती थी। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आठ महीने की सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने जैसी बातें भी सामने आई हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि इतने गंभीर आरोप लगातार सामने आते रहे तो आखिर सरकार को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि जब संबंधित ट्रस्ट में गृह विभाग का एक अधिकारी भी मौजूद था, तब भी कथित अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
आईबी रिपोर्ट और एसआईटी गठन पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें सूत्रों से जानकारी मिली है कि कथित अनियमितताओं को लेकर खुफिया एजेंसी (आईबी) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को कई रिपोर्टें भेजी थीं। हालांकि उन्होंने इन रिपोर्टों का कोई सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला अधिक चर्चा में आया तब लोगों का ध्यान हटाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना प्राथमिकी दर्ज किए एसआईटी गठित करने का फैसला किस आधार पर लिया गया। उनके अनुसार बाद में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई, लेकिन जांच की दिशा और कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल खड़े हुए।
केजरीवाल ने अपने बयान के अंत में कहा कि देश के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कथित तौर पर इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं तो वास्तविक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कब होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि आखिर किन लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है और इसके पीछे क्या वजह है।













