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धनखड़ का इस्तीफा: 11 दिन पहले कहा था '2027 में रिटायर होऊंगा', फिर अचानक क्यों छोड़ा देश का दूसरा सबसे बड़ा पद?

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 2027 में रिटायर होने की घोषणा के महज 11 दिन बाद अचानक इस्तीफा दे दिया। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देने के बावजूद, इस फैसले के पीछे संभावित राजनीतिक रणनीति की भी चर्चा जोरों पर है।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Tue, 22 Jul 2025 2:39:44

 धनखड़ का इस्तीफा: 11 दिन पहले कहा था '2027 में रिटायर होऊंगा', फिर अचानक क्यों छोड़ा देश का दूसरा सबसे बड़ा पद?

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, सोमवार (21 जुलाई 2025) की देर शाम उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सभी को चौंकाते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखते हुए कहा कि वह अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए और डॉक्टरों की सलाह पर यह कदम उठा रहे हैं। हालांकि उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन दो वर्ष पूर्व ही पद त्याग देना कई राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं को जन्म दे रहा है।

11 दिन पहले दिया था कार्यकाल पूरा करने का संकेत

जगदीप धनखड़
के इस अचानक फैसले ने तब और ज्यादा चौंकाया जब यह सामने आया कि 10 जुलाई 2025 को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं कहा था कि "मैं 2027 में रिटायर हो जाऊंगा"। यह बयान महज़ 11 दिन पुराना है। इससे पहले भी मार्च 2025 में उन्हें सीने में दर्द की शिकायत पर एम्स में भर्ती कराया गया था और जून में उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान भी उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई थी।

एनडीए ने बनाया था उपराष्ट्रपति पद का चेहरा

धनखड़ को 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने 6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को भारी मतों से हराया था—जहां उन्हें 528 वोट मिले, वहीं अल्वा को केवल 182 वोट प्राप्त हुए। 10 अगस्त 2022 को उन्होंने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी।

अभी दो साल बाकी थे कार्यकाल में

धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था, यानि कि अभी 2 वर्ष से अधिक का समय बचा हुआ था। ऐसे में यह सहसा इस्तीफा केवल एक स्वास्थ्य कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक निहितार्थों की ओर भी इशारा करता है। उन्होंने अपने पत्र में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया।

सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल

धनखड़ के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं तेज़ हो गई हैं। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सवाल उठाया कि "यह चौंकाने वाला है क्योंकि वह संसद में पूरी तरह सक्रिय थे।" वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि "प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने अब तक न तो कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी, न ही कोई धन्यवाद या शुभकामनाएं। यह चुप्पी किसी बड़े घटनाक्रम की आहट लगती है।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभवतः यह किसी आंतरिक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, या फिर धनखड़ को आगे कोई नई भूमिका दी जाने वाली है—जैसे राष्ट्रपति चुनाव या संगठनात्मक दायित्व।

उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले तीसरे व्यक्ति

धनखड़, भारत के इतिहास में तीसरे ऐसे उपराष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद त्याग दिया। इससे पहले वीवी गिरि ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था, जबकि 2002 में कृष्णकांत का कार्यकाल के दौरान निधन हो गया था।
इस्तीफे से कुछ घंटे पहले की अध्यक्षता

धनखड़ ने इस्तीफे से सिर्फ कुछ घंटे पहले राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की थी और सदन में सद्भावना और गरिमा बनाए रखने की अपील भी की थी। उनके इस्तीफे के समय राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति, कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और जयपुर का प्रस्तावित दौरा (23 जुलाई) तय था, जहां उन्हें CREDAI (रियल एस्टेट डेवलपर्स संगठन) के साथ बैठक करनी थी।

क्या सेहत ही असली वजह है या कुछ और?

उनकी हालिया एंजियोप्लास्टी, बार-बार अस्पताल में भर्ती होना, और डॉक्टरों की सलाह—ये सभी कारण उनके बयान के समर्थन में दिखते हैं। लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए, विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि "क्या स्वास्थ्य कारण केवल एक औपचारिक कारण है या इस इस्तीफे के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक योजना है?"

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