
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बड़ा फैसला लेते हुए बिहार में महागठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इस कदम ने न सिर्फ बिहार बल्कि झारखंड की राजनीति में भी हलचल मचा दी है।
बीजेपी ने साधा राहुल और तेजस्वी पर निशाना
जेएमएम के इस कदम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार किया है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा— “बिहार में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और यह साफ कहा है कि अब वह महागठबंधन का हिस्सा नहीं है। इतना ही नहीं, जेएमएम ने झारखंड में भी गठबंधन पर पुनर्विचार की बात कही है। राहुल और तेजस्वी का अहंकार ही महागठबंधन के टूटने की असली वजह है। बिहार इससे बच गया।”
छह सीटों पर अकेले उतरेगी JMM
जेएमएम ने ऐलान किया है कि वह बिहार की छह विधानसभा सीटों — चकाई, धमदाहा, कटोरिया (सुरक्षित), मनिहारी (सुरक्षित), जमुई और पीरपैंती पर चुनाव लड़ेगी। इन सीटों पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा।
पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “हमने बिहार में अपने दम पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। एनडीए के साथ-साथ महागठबंधन के भीतर भी भारी विरोधाभास हैं। कई सीटों पर अंदरूनी कलह की स्थिति है। अब वक्त आ गया है कि हम राज्य में गठबंधन की समीक्षा करें क्योंकि हमें बार-बार धोखा दिया गया है।”
महागठबंधन पर JMM का सीधा हमला
भट्टाचार्य ने आगे कहा, “हम अब महागठबंधन के साथ नहीं रह सकते। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ विश्वासघात किया है। हम सुनिश्चित करेंगे कि बिहार में बनने वाली अगली सरकार में जेएमएम की भी अहम भूमिका रहे।”
गौरतलब है कि बिहार में महागठबंधन के घटक दल — आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच कई सीटों पर मतभेद बढ़ चुके हैं। बछवाड़ा, रोसरा और राजापाकर जैसी सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ आमने-सामने हैं।
चुनावी समीकरणों में बढ़ी हलचल
बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों में — 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।
जेएमएम का यह निर्णय आरजेडी के लिए सिरदर्द बन गया है, खासकर झारखंड और बिहार की सीमावर्ती सीटों पर, जहां जेएमएम का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जेएमएम का यह कदम न सिर्फ महागठबंधन के लिए झटका है, बल्कि झारखंड के भीतर भी आने वाले दिनों में गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर सकता है।













