
बिहार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है और अब 14 नवंबर को नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। इस बीच, तमाम सर्वे एजेंसियों ने अपने-अपने एग्जिट पोल जारी कर दिए हैं, जिनमें से अधिकतर ने एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने का अनुमान जताया है। इन सर्वेक्षणों के अनुसार, महागठबंधन को पिछली बार की तुलना में बड़ी हार झेलनी पड़ सकती है। हालांकि, एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं, क्योंकि बिहार का हालिया चुनावी इतिहास बताता है कि यहां सर्वेक्षणों की भविष्यवाणियां अक्सर गलत साबित हुई हैं।
पिछले दो विधानसभा चुनावों — 2015 और 2020 — में एग्जिट पोल्स की ज्यादातर भविष्यवाणियां धराशायी हो गई थीं। जिन दलों को सर्वे में जीत का दावा मिला था, वे नतीजों में हार गए थे। यही वजह है कि इस बार के एग्जिट पोल्स को लेकर भी मतदाताओं और राजनीतिक हलकों में सावधानी और संशय बना हुआ है।
2020 का उदाहरण: जब सर्वे निकले गलत और समीकरण पलट गया
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल्स ने महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत की भविष्यवाणी की थी। कई एजेंसियों ने तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने तक की बातें कह दी थीं। उस समय आरजेडी के समर्थकों ने बधाई वाले पोस्टर तक लगा दिए थे।
एबीपी न्यूज-सी वोटर ने महागठबंधन को 108–131 सीटें और एनडीए को 104–128 सीटें दी थीं। वहीं, आजतक-एक्सिस माय इंडिया ने एनडीए को 69–91 और महागठबंधन को 139–161 सीटें दीं। रिपब्लिक भारत-जन की बात ने भी महागठबंधन को बढ़त में दिखाया था — उसे 118–138 सीटें और एनडीए को 91–117 सीटें दी गईं।
‘टुडेज चाणक्य’ ने तो एनडीए के लिए बेहद निराशाजनक आंकड़ा दिया था — सिर्फ 55 सीटें, जबकि महागठबंधन को 180 सीटें दी थीं। लेकिन जब वास्तविक नतीजे आए, तो तस्वीर पूरी तरह उलट गई। एनडीए ने अप्रत्याशित रूप से बहुमत हासिल किया और नीतीश कुमार ने फिर से मुख्यमंत्री पद संभाला। इन गलत अनुमानों ने एक बार फिर एग्जिट पोल्स की सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए थे।
2015 में भी फेल रहे थे एग्जिट पोल्स
2015 के चुनाव में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही थी। उस समय महागठबंधन (आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस) ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जबकि एनडीए की अगुवाई बीजेपी कर रही थी। एग्जिट पोल्स के अनुसार एनडीए की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन जनता का फैसला इससे बिल्कुल विपरीत निकला।
‘टुडेज चाणक्य’ ने एनडीए को 155 और महागठबंधन को केवल 85 सीटें दी थीं। इसी तरह, ‘आजतक-सिसेरो’ ने एनडीए को 113–127 और महागठबंधन को 111–123 सीटों के बीच दिखाया था। अधिकांश सर्वेक्षणों ने यह संकेत दिया था कि बिहार में एनडीए की सरकार बनने जा रही है।
हालांकि, कुछ सर्वेक्षणों — जैसे सी-वोटर और एबीपी न्यूज — ने करीबी मुकाबले में महागठबंधन को थोड़ा आगे बताया था। सी-वोटर ने एनडीए को 101–121 और महागठबंधन को 112–132 सीटें दी थीं। वहीं, एबीपी न्यूज ने एनडीए को 108 और महागठबंधन को 130 सीटों पर जीत का अनुमान जताया था।
लेकिन जब वास्तविक नतीजे आए, तो महागठबंधन ने एकतरफा जीत दर्ज की। आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस गठबंधन ने 178 सीटें जीतकर बहुमत से सरकार बनाई, जबकि एनडीए को मात्र 58 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
इस बार भी नजरें 14 नवंबर पर
अब जबकि एक बार फिर बिहार का राजनीतिक तापमान चरम पर है और एग्जिट पोल्स एनडीए की बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं, तब यह सवाल उठना लाजमी है — क्या इस बार भी इतिहास खुद को दोहराएगा?
पिछले दो चुनावों में एग्जिट पोल्स की गलत भविष्यवाणियों ने जनता के बीच इनकी विश्वसनीयता को कमजोर किया है। ऐसे में 14 नवंबर का दिन यह तय करेगा कि इस बार के आंकड़े हकीकत के कितने करीब हैं, या फिर वे एक बार फिर सिर्फ कागज़ी भविष्यवाणियां साबित होंगे।














