
एशिया कप 2025 के सुपर-4 स्टेज में भारत एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले की तैयारी में है, और इस बार दांव पहले से कहीं ज्यादा ऊंचा है। अब तक टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने यूएई, पाकिस्तान और ओमान के खिलाफ जीत दर्ज कर एक मज़बूत लय बना ली है, लेकिन इन शानदार जीतों के बावजूद एक बड़ा सवाल अब भी टीम इंडिया के सामने खड़ा है—क्या डेथ ओवर्स में उनकी गेंदबाज़ी वास्तव में उतनी भरोसेमंद है?
अब तक भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में केवल एक प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ के साथ मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई है। जसप्रीत बुमराह के साथ नई गेंद साझा करने की जिम्मेदारी ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या निभा रहे हैं। पंड्या ने हाल के समय में, विशेष रूप से आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गेंद के साथ बढ़िया प्रदर्शन किया है, लेकिन मैच के आखिरी ओवरों में गेंदबाज़ी भारत के लिए चिंता का कारण बन गई है।
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में यह कमजोरी साफ नज़र आई। जब पाकिस्तान 17 ओवर में 90/7 पर था, तो लगा कि वह 100 रन भी नहीं बना पाएंगे। लेकिन आखिरी के तीन ओवरों में भारत ने 37 रन लुटाए। जसप्रीत बुमराह का प्रदर्शन भी उस दिन औसत से नीचे रहा और उन्होंने 19वें ओवर में 12 रन दिए। वहीं शाहीन अफरीदी ने कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती और पंड्या की गेंदों पर चार छक्के जड़ दिए और पाकिस्तान को 127/9 तक पहुंचा दिया।
हालांकि भारत ने मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया, लेकिन यह कमी कहीं न कहीं टीम प्रबंधन को सोचने पर मजबूर जरूर कर गई। ओमान के खिलाफ ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में भी यही समस्या दोहराई गई। अंतिम चार ओवरों में भारत ने 36 रन दे दिए, जिसमें से 22 रन अकेले अर्शदीप सिंह ने लुटाए। जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में भारतीय गेंदबाज़ी बिखरती नज़र आई और ओमान 188 के लक्ष्य का पीछा करते हुए 167/4 तक पहुंच गया।
ये आंकड़े सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि संकेत हैं कि सुपर-4 जैसे निर्णायक चरण में इस तरह की चूक भारी पड़ सकती है। टूर्नामेंट जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा है, टीम इंडिया के पास अब गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची है। हार्दिक पंड्या और एक एक्स्ट्रा ऑलराउंडर के साथ खेलना बैटिंग को तो मज़बूती देता है, लेकिन डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ी की कमज़ोरी सामने लाता है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट को जल्द ही संतुलन साधना होगा।
पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी अपनी राय साझा करते हुए कहा है कि भारतीय टीम संभवतः पाकिस्तान के खिलाफ पिछली जीत वाली ही प्लेइंग इलेवन के साथ उतर सकती है। उन्होंने बताया कि अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा, दोनों ही ओमान के खिलाफ उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। ऐसे में टीम बुमराह और हार्दिक की जोड़ी को नई गेंद के साथ उतार सकती है और फिर स्पिनरों से मिडल ओवर्स में विकेट निकलवाने का प्लान बना सकती है।
गावस्कर ने कहा, “मुझे लगता है कि टीम वही संयोजन बरकरार रखेगी। अर्शदीप और हर्षित को ज़्यादा ओवर नहीं मिले, लेकिन जो मिले उसमें वे महंगे साबित हुए। ऐसे में बुमराह और हार्दिक के साथ शुरुआत करके फिर स्पिनरों पर भरोसा करना ही बेहतर विकल्प होगा।”
सुपर-4 का यह भारत-पाक मुकाबला न केवल क्रिकेट के लिहाज़ से अहम है, बल्कि हाल ही में सामने आई नो-हैंडशेक विवाद के बाद खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी अधिक है। ऐसे में कप्तान सूर्यकुमार यादव को एक बार फिर कुछ मुश्किल फैसलों का सामना करना पड़ेगा। क्या टीम में अर्शदीप को वापस लाकर वरुण चक्रवर्ती को बाहर किया जाएगा, या फिर जीत के क्रम को न छेड़ने की नीति अपनाई जाएगी?
अगर भारत एक ही प्लेइंग इलेवन के साथ जाता है, तो हार्दिक पंड्या और स्पिनर्स को डेथ ओवर्स में बुमराह का भरपूर साथ देना होगा। वर्ना, इस छोटी सी चूक का खामियाज़ा टीम को एशिया कप की ट्रॉफी गंवाकर चुकाना पड़ सकता है।














