भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में खुद की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा कि जिन नाइंसाफियों का उन्होंने सामना किया है, उन्हें देखते हुए उन्हें लगता है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP को लेकर भी चर्चा बनी हुई है।
माल्या ने पोस्ट में लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”
माल्या ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
विजय माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई सरकारी कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया बयानों में उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ब्रिटेन में उन पर लगे कानूनी प्रतिबंधों के कारण वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।
माल्या ने अपनी संपत्तियों को लेकर भी दावा किया है। उनके मुताबिक, उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से ज्यादा रकम वसूल की है। एक रिपोर्ट के अनुसार, माल्या ने करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच किए जाने का दावा किया है, जबकि उन्होंने अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताई है। यह आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही सामने आए हैं और इन्हें अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बॉम्बे हाईकोर्ट में भी उठा संपत्ति वसूली का मुद्दा
अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंकों की रिकवरी से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।
‘कॉकरोच’ शब्द से CJP की पहचान जुड़ी
माल्या के बयान का एक पहलू ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP से भी जुड़ता है। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, 2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर चर्चा में आया। CJP की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं।
इस आंदोलन ने बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक आवाज जैसे मुद्दों को उठाया। आंदोलन की चर्चा तब बढ़ी, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने का जिक्र सामने आया।
CJP ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपने लिए व्यंग्यात्मक पहचान के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया। इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़कों तक पहुंचा और शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। संदर्भ सामग्री के अनुसार, जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दबाव में आकर इस्तीफा दिया था।
CJP से जुड़े कई मामले चर्चा में
सितंबर में CJP समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया था। एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। अदालत ने इस संबंध में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।
इसके अलावा, CJP को लेकर एक अलग कानूनी विवाद भी सामने आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।













