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धनखड़ के इस्तीफे की वजहें: मल्लिकार्जुन खरगे को मंच, जेपी नड्डा को रोका — सरकार से बढ़ती दूरी की कहानी?

धनखड़ का इस्तीफा एक साधारण संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता और संवैधानिक पदों के बीच खिंचती राजनीतिक रेखाओं का परिणाम था। सत्ता से दूरी और विपक्ष से बढ़ती नज़दीकियां इस बदलाव की मुख्य वजह बन गईं।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Thu, 24 Jul 2025 1:44:44

धनखड़ के इस्तीफे की वजहें: मल्लिकार्जुन खरगे को मंच, जेपी नड्डा को रोका — सरकार से बढ़ती दूरी की कहानी?

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में कई कयास लगाए जा रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने अचानक पद छोड़ने का फैसला किया? अब जबकि नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, ध्यान इस बात पर भी है कि इस्तीफे के पीछे असली कारण क्या था। खबरों की मानें तो यह केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसके पीछे सत्ता के गलियारों में चल रही गहरी नाराजगी छिपी थी।

विपक्ष को मिली अहमियत, सत्ता को खटका व्यवहार


जगदीप धनखड़ ने हाल के महीनों में विपक्षी नेताओं के प्रति जिस तरह का व्यवहार अपनाया, वह सरकार को खटकने लगा था। संसद के भीतर उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को आतंकी हमले पर प्रतिक्रिया देने का मंच दिया, लेकिन जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जवाब देने खड़े हुए तो उन्हें हाथ के इशारे से बैठा दिया। संसदीय प्रोटोकॉल के अनुसार, अगर विपक्ष सवाल उठाता है तो सरकार को जवाब देने का पूरा हक है — ऐसे में नड्डा को रोका जाना सरकार के लिए असहज क्षण बन गया।

महाभियोग प्रस्ताव पर सरकार से सीधी टक्कर

बात सिर्फ व्यवहार तक ही सीमित नहीं थी। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को धनखड़ ने मंजूरी दे दी — जबकि सरकार की ओर से उन्हें यह कदम न उठाने की स्पष्ट सलाह दी गई थी। इसे सत्ता पक्ष ने चुनौती की तरह लिया। यहां तक कहा जा रहा है कि सरकार खुद धनखड़ के खिलाफ महाभियोग की संभावना पर विचार करने लगी थी, जिसकी भनक लगते ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

जेपी नड्डा की नाराजगी से मिली संकेत

विवाद उस समय और गहरा गया जब जेपी नड्डा को बोलने से रोका गया। आमतौर पर शांत रहने वाले नड्डा इस पर नाराज़ हो गए और उन्होंने अपना विरोध जताया। यह घटना स्पष्ट संकेत थी कि सत्ता और उपराष्ट्रपति के बीच संवाद की दीवार खड़ी हो गई है। उसके बाद जब धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार किया, तो सरकार को लगा कि स्थिति अब हाथ से निकल चुकी है।

व्यक्तिगत आकांक्षाएं भी बनीं वजह?

सूत्रों के अनुसार, धनखड़ सरकार से कुछ विशेष सम्मान और सुविधाओं की अपेक्षा रखते थे — जैसे प्रधानमंत्री की तरह प्रोटोकॉल, सरकारी मंत्रालयों में उनकी तस्वीरें लगाने की मांग, और विदेशी समकक्षों से विशेष मुलाकातें। उन्होंने यहां तक कहा था कि उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से औपचारिक रूप से मिलवाया जाना चाहिए, क्योंकि वह उनके समकक्ष हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के बाद बदला व्यवहार

एक और अहम मोड़ तब आया जब दिसंबर 2023 में विपक्ष ने खुद धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। यह झटका उनके लिए अप्रत्याशित था। इसके बाद से ही उनका रवैया बदलने लगा। पहले जहां वह जनसंख्या असंतुलन और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार की लाइन को मजबूती से रखते थे, वहीं बाद में वे विपक्ष से मेलजोल बढ़ाने लगे। उन्होंने कई विपक्षी नेताओं से निजी मुलाकातें कीं और उन बैठकों में सरकार की आलोचना भी की।

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