नई दिल्ली। डिजिटल लेनदेन और क्रेडिट कार्ड के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे माहौल में बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी ग्राहक के क्रेडिट कार्ड से धोखाधड़ी वाला लेनदेन होता है और वह इसकी जानकारी बैंक को देता है, तो बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर ग्राहक को राहत प्रदान करनी होगी।
नए नियमों के अनुसार, फ्रॉड से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद बैंक को अधिकतम पांच दिनों के भीतर विवादित रकम का अस्थायी क्रेडिट ग्राहक के खाते में उपलब्ध कराना होगा। इससे जांच पूरी होने तक ग्राहक पर आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा और उसे अतिरिक्त ब्याज या भुगतान संबंधी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या कहता है RBI का नया निर्देश?
रिजर्व बैंक के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के क्रेडिट कार्ड से अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन होता है और वह इसकी सूचना बैंक को देता है, तो बैंक को शिकायत दर्ज होने के पांच दिनों के भीतर उस राशि का "शैडो रिवर्सल" देना होगा। इसका अर्थ यह है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक विवादित रकम को अस्थायी रूप से ग्राहक की देनदारी से अलग रखा जाएगा।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्राहक को उस राशि का भुगतान नहीं करना पड़ेगा, जिस पर विवाद चल रहा है। साथ ही, उस रकम पर किसी प्रकार का अतिरिक्त ब्याज या लेट फीस भी नहीं जोड़ी जाएगी। RBI ने स्पष्ट किया है कि यह नया प्रावधान 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा।
किन परिस्थितियों में मिलेगी पूरी सुरक्षा?
केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों की जिम्मेदारी और बैंक की जवाबदेही को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि यह पाया जाता है कि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही, सुरक्षा खामी या सिस्टम की कमजोरी के कारण हुई है, तो ग्राहक पर किसी भी प्रकार की वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी।
ऐसी स्थिति में बैंक को पूरी विवादित राशि वापस करनी होगी, चाहे ग्राहक ने घटना की सूचना तुरंत दी हो या नहीं। RBI का मानना है कि जब गलती बैंकिंग व्यवस्था की हो, तो उसका बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता।
इसके अलावा यदि किसी तीसरे पक्ष की वजह से फ्रॉड हुआ है और ग्राहक घटना की जानकारी पांच दिनों के भीतर बैंक को दे देता है, तो भी उसे "जीरो लायबिलिटी" का लाभ मिलेगा। यानी ग्राहक को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
हालांकि, यदि शिकायत पांच दिनों की निर्धारित अवधि के बाद दर्ज की जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी संबंधित बैंक की नीति और मामले की परिस्थितियों के आधार पर तय की जाएगी।
हर बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलेगा तत्काल अलर्ट
ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से RBI ने बैंकों के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अब 500 रुपये से अधिक के प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर ग्राहकों को तत्काल SMS अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा।
इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को उनके खाते या कार्ड पर होने वाली गतिविधियों की तुरंत जानकारी देना है, ताकि किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की स्थिति में वे बिना देरी किए बैंक को सूचित कर सकें।
500 रुपये तक के ट्रांजैक्शन के लिए अलर्ट भेजने का निर्णय बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार ले सकेंगे। हालांकि RBI ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी अलर्ट सुविधा के लिए ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
साथ ही बैंकों को ऐसे तकनीकी सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकें और ग्राहकों को अधिक सुरक्षित बैंकिंग अनुभव प्रदान करें।
छोटे डिजिटल फ्रॉड पीड़ितों के लिए भी राहत
रिजर्व बैंक ने छोटे मूल्य की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी पीड़ित ग्राहकों को सहायता देने का प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति को डिजिटल फ्रॉड के कारण 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है और जांच में वह वास्तविक पीड़ित पाया जाता है, तो उसे मुआवजा दिया जाएगा।
ऐसे मामलों में ग्राहक को हुए नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये तक की राशि मुआवजे के रूप में प्रदान की जा सकती है। हालांकि यह सुविधा प्रत्येक ग्राहक को जीवनकाल में केवल एक बार उपलब्ध होगी।
ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के ये नए नियम डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली में ग्राहकों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड के उपयोग में तेज वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों के मामले भी बढ़े हैं।
ऐसे में शिकायत के बाद त्वरित राहत, जीरो लायबिलिटी का प्रावधान, तत्काल अलर्ट सिस्टम और छोटे फ्रॉड मामलों में मुआवजे जैसी व्यवस्थाएं ग्राहकों को अधिक सुरक्षा प्रदान करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले ये नियम बैंकिंग क्षेत्र में उपभोक्ता संरक्षण को और मजबूत बनाएंगे तथा डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।













