ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस महत्वपूर्ण समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के दौरान खामेनेई की मौत हुई थी, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भारत की ओर से कौन करेगा प्रतिनिधित्व?
WION की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अंतिम संस्कार समारोह में भारत की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेजा जाएगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
खामेनेई के निधन के बाद भारत ने संवेदना व्यक्त करते हुए नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक दर्ज कराया था। 28 फरवरी को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास पहुंचकर भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए थे और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
इससे पहले मई 2024 में जब तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, तब भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी। उस अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया था और तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा गया था। ऐसे में इस बार भी भारत की भागीदारी को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
4 जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम
क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में देरी हुई थी। अब ईरानी प्रशासन ने 4 जुलाई से आधिकारिक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 4 जुलाई को खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला कॉम्प्लेक्स में आम लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा।
इसके बाद राजधानी तेहरान और धार्मिक महत्व के शहर कोम में विशाल जन जुलूस निकाले जाएंगे। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। ईरानी प्रशासन का कहना है कि यह कार्यक्रम देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक को अंतिम विदाई देने का अवसर होगा।
नजफ, कर्बला और मशहद में होंगे विशेष आयोजन
अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे। इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में भी विशेष प्रार्थना सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में विभिन्न देशों से आए धार्मिक नेताओं और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम का समापन 9 जुलाई को खामेनेई के पैतृक शहर मशहद में होगा। यहां स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए लाखों लोग मशहद पहुंच सकते हैं। लगभग चार दशकों तक ईरान की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक नेतृत्व को दिशा देने वाले खामेनेई को यह आधिकारिक विदाई दी जाएगी।
भारत-ईरान संबंधों पर भी रहेगी नजर
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध रहे हैं। नई दिल्ली हमेशा ईरान को अपने विस्तारित पड़ोस का एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता रहा है। पश्चिम एशिया में हाल ही में चले 40 दिनों के संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत की थी।
हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उनकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी।
बीते कुछ महीनों में कई वरिष्ठ ईरानी नेताओं और अधिकारियों ने भारत का दौरा किया है। विशेष रूप से ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों के जरिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगातार मजबूत हुआ है। ऐसे में खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी को भी दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई देशों को भेजा गया आधिकारिक निमंत्रण
ईरान ने इस राजकीय अंतिम संस्कार के लिए दुनिया के अनेक देशों को आमंत्रित किया है। विशेष रूप से पड़ोसी देशों और रणनीतिक साझेदारों को समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजे गए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, कई देशों ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है, जबकि कुछ देशों ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की इच्छा जताई है।
अधिकारियों के मुताबिक, अंतिम संस्कार समारोह में इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, लेबनान, रूस, चीन और मध्य एशिया के कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद रह सकते हैं। ऐसे में यह समारोह केवल एक राजकीय अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।













