प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश और विशेष रूप से बंगाल के इतिहास में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि उस दौर में डॉ. मुखर्जी ने दृढ़ता के साथ आवाज नहीं उठाई होती, तो बंगाल का एक बड़ा हिस्सा आज भारत का हिस्सा नहीं होता।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आज भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों और विचारों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की राजनीतिक यात्रा भी उन्हीं राष्ट्रवादी सिद्धांतों से प्रेरित रही है, जिनके लिए मुखर्जी जीवनभर संघर्ष करते रहे।
बंटवारे के दौर का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विभाजन के समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब बंगाल के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे थे, तब कांग्रेस नेतृत्व उन ताकतों के सामने झुक गया था जो पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करना चाहती थीं।
उन्होंने कहा कि उस समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया और बंगाल के लोगों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, मुखर्जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रयासों के कारण ही बंगाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में बना रह सका।
पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास के इन तथ्यों को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की गई, लेकिन सच्चाई को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस ने लोगों को इतिहास की अधूरी और भ्रामक तस्वीर दिखाने का प्रयास किया।
A milestone for India’s maritime security! Speaking at the Tri Commissioning ceremony of INS Agray, INS Dunagiri and INS Sanshodhak in Kolkata. @indiannavy https://t.co/obmbDiY4T0
— Narendra Modi (@narendramodi) June 21, 2026
‘कांग्रेस ने बंगाल को उसके हाल पर छोड़ दिया’
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के कठिन दौर में कांग्रेस ने बंगाल को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद भी राज्य के विकास और सामाजिक संतुलन की बजाय तुष्टिकरण की राजनीति को प्राथमिकता दी गई।
उनके अनुसार, दशकों तक चली इस राजनीति का असर राज्य की प्रगति पर पड़ा। उन्होंने कहा कि अब बंगाल के लोग पुराने राजनीतिक समीकरणों से आगे बढ़कर विकास और सुशासन की दिशा में सोच रहे हैं।
मोदी ने कहा कि राज्य के नागरिक अब वास्तविक परिवर्तन को महसूस कर रहे हैं और यही वजह है कि प्रदेश में नई राजनीतिक और सामाजिक ऊर्जा दिखाई दे रही है।
‘बंगाल की हवा में बदलाव महसूस हो रहा है’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि चुनाव और नई सरकार के गठन के बाद पहली बार उन्हें बंगाल के लोगों के बीच आने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य का माहौल पहले की तुलना में बदला हुआ नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा, “आज बंगाल की हवा में एक नई ताजगी महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे राज्य पुरानी बेड़ियों से मुक्त होकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। बंगाल का गौरव और आत्मविश्वास फिर से लौटता हुआ दिखाई दे रहा है।”
प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनावों के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की ताकत तब दिखाई देती है जब जनता अपने मताधिकार के माध्यम से परिवर्तन का रास्ता चुनती है। उन्होंने कहा कि बंगाल इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
लोगों के चेहरे पर दिख रहा भरोसा : पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने और लोगों से बातचीत करने पर उन्हें सकारात्मक माहौल महसूस हुआ। उनके अनुसार गांवों और शहरों में लोगों के बीच उम्मीद और विश्वास का वातावरण दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा, “आज बंगाल के लोगों के चेहरों पर आत्मविश्वास झलक रहा है। गांवों में विकास को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं और नागरिकों को भरोसा है कि आने वाले समय में राज्य और तेज गति से आगे बढ़ेगा।”
मोदी ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक वोट की ताकत कितनी महत्वपूर्ण होती है, इसका उदाहरण बंगाल में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर भी साधा निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने लंबे समय तक इस प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की थीं।
उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय हितों से जुड़ा विषय है और इस दिशा में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री के अनुसार, पहले जिन परियोजनाओं को विभिन्न कारणों से रोका गया था, अब उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रशासन के दौरान सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जा रही है।
उनके अनुसार, जो लोग सार्वजनिक संसाधनों का गलत इस्तेमाल करते हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सुशासन की मूल शर्त होती है और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
‘पश्चिमबंग दिवस’ के महत्व को समझना जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने 20 जून को मनाए जाने वाले ‘पश्चिमबंग दिवस’ का उल्लेख करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में अवश्य जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक तारीख नहीं है, बल्कि बंगाल के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय है। युवाओं को यह जानना चाहिए कि किन परिस्थितियों और संघर्षों के बाद वर्तमान पश्चिम बंगाल का स्वरूप अस्तित्व में आया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास को समझना और उससे सीख लेना भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसलिए समाज को ऐसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवसरों को याद रखना चाहिए।
योग दिवस कार्यक्रम में भी हुए शामिल
कोलकाता दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने हजारों लोगों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
योग कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट जाने का भी कार्यक्रम तय था। उनके इस दौरे को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विकास, इतिहास, राष्ट्रीय सुरक्षा और बंगाल की राजनीतिक दिशा जैसे कई मुद्दों पर उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी।












