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बाजार की रफ्तार पर लगा ब्रेक, तीन दिन की बढ़त ध्वस्त, 5.3 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा टूटा

तीन दिन की लगातार तेजी के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा टूटा और निवेशकों के 5.3 लाख करोड़ रुपये डूब गए। जानें गिरावट के 5 बड़े कारण, बैंकिंग और हैवीवेट शेयरों की कमजोरी तथा वैश्विक संकेतों का असर।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 19 Feb 2026 4:17:49

बाजार की रफ्तार पर लगा ब्रेक, तीन दिन की बढ़त ध्वस्त, 5.3 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा टूटा

घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीन सत्रों तक जारी मजबूती गुरुवार को अचानक थम गई। सुबह की सकारात्मक शुरुआत के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि पूरी तेजी ध्वस्त हो गई। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 5.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

दोपहर बाद गिरावट और गहरी होती चली गई। BSE Sensex 1400 अंकों से अधिक फिसलकर 82,825 के स्तर पर आ गया, जो करीब एक प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। इसी तरह NIFTY 50 भी लगभग 260 अंक टूटकर 25,559 पर बंद हुआ। व्यापक बाजार में कमजोरी का असर बीएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी पड़ा, जो घटकर लगभग 467 लाख करोड़ रुपये के आसपास सिमट गया।

दिग्गज शेयरों ने खींचा बाजार नीचे


आज की गिरावट में बड़े और प्रभावशाली शेयरों की अहम भूमिका रही। हैवीवेट कंपनियों में तेज बिकवाली से इंडेक्स पर सीधा दबाव पड़ा।
कमजोरी दिखाने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे –
Reliance Industries,
HDFC Bank,
ICICI Bank,
Kotak Mahindra Bank,
Larsen & Toubro,
Hindustan Unilever और
ITC Limited।

हालांकि आईटी सेक्टर ने कुछ हद तक संतुलन बनाने की कोशिश की। Infosys और Tata Consultancy Services में हल्की मजबूती देखने को मिली, लेकिन यह तेजी व्यापक गिरावट को थामने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

गिरावट के पीछे रहे 5 बड़े कारण

1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बेचैनी


विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीतिक तनाव बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर साबित हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित टकराव की खबरों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। मध्य पूर्व वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का अहम केंद्र है और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज से बड़ी मात्रा में तेल निर्यात होता है। यदि इस मार्ग में कोई व्यवधान आता है तो ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल संभव है, जिससे वैश्विक महंगाई और वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।

2. तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली

पिछले तीन कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1.4% की बढ़त दर्ज की गई थी। दिसंबर तिमाही के बेहतर नतीजों ने बाजार को सहारा दिया था, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। जैसे ही बिकवाली बढ़ी, सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में आ गए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी स्पष्ट दिखी, जिससे गिरावट व्यापक हो गई।

3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

ऊर्जा बाजार की हलचल ने भी निवेशकों को चिंतित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Brent Crude की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। पिछले सत्र में इसमें 4% से अधिक की तेजी आई थी, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी 65 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए तेल की कीमतों में वृद्धि का अर्थ है बढ़ती महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव, जो इक्विटी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।

4. इंडिया VIX में तेज बढ़ोतरी

बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी करीब 5% चढ़कर 12.83 के स्तर पर पहुंच गया। VIX में उछाल यह दर्शाता है कि निवेशक आने वाले समय में तेज उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। जब अस्थिरता का सूचकांक बढ़ता है, तो आमतौर पर ट्रेडर्स सतर्क रुख अपनाते हैं और पोजिशन हल्की करने लगते हैं। इसका असर मुख्य सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया।

5. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में कमजोरी


बैंकिंग सेक्टर में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। Kotak Mahindra Bank, Axis Bank और IndusInd Bank के शेयर 1% से 1.8% तक टूटे। इसी दौरान बैंक निफ्टी दोपहर में करीब 61,000 के आसपास कारोबार करता दिखा। वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में भी दबाव बना रहा। Shriram Finance, Bajaj Finance और SBI Life Insurance के शेयरों में 1% से 2% तक की गिरावट आई।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख


जहां भारतीय बाजार दबाव में रहे, वहीं एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 3% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का Nikkei 225 करीब 1% चढ़ा। हांगकांग और चीन के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितता, तेल कीमतों में तेजी, मुनाफावसूली और बैंकिंग शेयरों की कमजोरी ने मिलकर बाजार की हालिया तेजी पर विराम लगा दिया। आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी।

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