
हाल ही में जोमैटो के सीईओ दीपेंदर गोयल का एक पॉडकास्ट सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर वायरल हो गया है। यह पॉडकास्ट यूट्यूबर राज शमानी के चैनल पर अपलोड किया गया था और देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इस पॉडकास्ट में दीपेंदर गोयल के कानपटी के पास एक सिल्वर रंग का छोटा सा डिवाइस दिखाई दिया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डिवाइस एक सेंसर की तरह काम करता है और इसे माथे या कानपटी के पास लगाया जाता है। इसका उद्देश्य दिमाग में रक्त प्रवाह, यानी ब्लड फ्लो, को लगातार मॉनिटर करना बताया जा रहा है। इस डिवाइस के शोध और निर्माण में दीपेंदर गोयल की कंपनी Eternal and Continuous Research ने करीब 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। गोयल का मानना है कि गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) दिमाग में रक्त की आपूर्ति को प्रभावित करता है, और लंबे समय में इससे याददाश्त और सोचने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इस डिवाइस के जरिए दिमाग में ब्लड फ्लो की सटीक जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों की राय
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस डिवाइस को लेकर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी भी तरह के डिवाइस का इस्तेमाल करने से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और पर्याप्त रिसर्च होना जरूरी है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिवाइस केवल त्वचा या सतही संकेतों (surface signals) को ही पढ़ सकता है। MRI मशीन की तरह सीधे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को मापने में यह सक्षम नहीं है। इसके अलावा, डॉक्टरों का यह भी कहना है कि यह डिवाइस दिमाग के अंदर होने वाले वास्तविक बदलावों या जटिल प्रक्रियाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड नहीं कर सकता।
postcast is fine, but what is this thing he's wearing?? pic.twitter.com/Oku16Oku1R
— priyanshu.sol (@priyanshudotsol) January 4, 2026
AIIMS डॉक्टर ने जताई चेतावनी
AIIMS दिल्ली के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुव्रंकार दत्ता, जो 2017 से धमनियों की कठोरता (arterial stiffness) पर शोध कर रहे हैं, ने इस डिवाइस को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने इसे केवल अमीरों के लिए “फैंसी खिलौना” बताया और कहा कि चिकित्सा उपकरण के तौर पर इसकी कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है।
डॉ. दत्ता ने आम जनता को सलाह दी है कि बिना प्रमाणित और वैज्ञानिक तरीके से विकसित तकनीक पर पैसा खर्च न करें। उनका कहना है कि ऐसे डिवाइस केवल आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इनका मेडिकल उद्देश्य और असर अभी किसी भी मानक पर साबित नहीं हुआ है।
इस प्रकार, दीपेंदर गोयल का टेंपल डिवाइस तकनीकी रूप से रोचक लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों और AIIMS डॉक्टर की चेतावनी स्पष्ट करती है कि इसे अब भी चिकित्सा उपकरण की तरह भरोसा करने से पहले गंभीर शोध और प्रमाण की आवश्यकता है।














