
राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है। सदन से लेकर सड़क तक इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने जांच की मौजूदा स्थिति और संभावित कार्रवाई पर खुलकर अपनी बात रखी है।
एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनके लिए नया नहीं है। जब वे विपक्ष में थे, तब भी उन्होंने जल जीवन मिशन में अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाई थी। उनके अनुसार, बीच में जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब एक बार फिर से एसीबी सक्रिय हो गई है और कार्रवाई तेज होती दिख रही है।
लंबे ठहराव के बाद ACB की विशेष टीम हुई सक्रिय
कृषि मंत्री का कहना है कि लंबे समय तक सुस्ती के बाद अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विशेष टीम पूरी तरह से काम में जुट गई है। उन्होंने संकेत दिए कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब “बड़ी मछलियां” रडार पर हैं।
मीणा के मुताबिक, अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, वे यह इशारा करते हैं कि मामला शुरुआती अनुमान से भी बड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह कथित घोटाला लगभग 960 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है। साथ ही, इस जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मामलों के भी खुलने की संभावना जताई गई है।
सुबोध अग्रवाल के संदर्भ में दिया बड़ा बयान
पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के फरार होने और उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी होने के सवाल पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति अपने आप में बहुत कुछ संकेत देती है।
मीणा के अनुसार, सुबोध अग्रवाल उनसे भी मिले थे और बातचीत में उन्होंने यह कहा था कि वे इस पूरे प्रकरण में अकेले नहीं हैं, बल्कि और भी लोग शामिल हैं। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और जांच के दायरे में अंततः सभी को आना ही पड़ेगा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो पहले से जमानत पर चल रहे महेश जोशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही, जांच का दायरा पिछली सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा दिए गए संकेतों का भी उल्लेख किया गया।
पेपर लीक मामले से की तुलना
कृषि मंत्री ने हालिया पेपर लीक प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह उस मामले में जांच की कड़ियां ऊपर तक जाती नजर आईं, ठीक उसी प्रकार जल जीवन मिशन से जुड़ी जांच में भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नेटवर्क आधारित भ्रष्टाचार में अक्सर परत-दर-परत खुलासे होते हैं और समय के साथ यह स्पष्ट हो जाता है कि किन-किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई है। उनके मुताबिक, मौजूदा जांच भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
फसल बीमा योजना की जांच की सिफारिश
इस दौरान मंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एसओजी को सिफारिश की गई है। साथ ही, जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है, उनके सर्वे और आकलन को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें समय पर राहत मिल सके।
सरकारी गवाह बनाने की कोशिश
किरोड़ी लाल मीणा ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने बाबूलाल करारा से मुलाकात की है और उन्हें सरकारी गवाह बनाने का प्रयास किया गया है। मंत्री का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से आगे बढ़ती है, तो पिछली सरकार से जुड़े कुछ बड़े चेहरे भी सामने आ सकते हैं।
कुल मिलाकर, जल जीवन मिशन से जुड़ा यह मामला अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एसीबी की सक्रियता और राजनीतिक बयानों के बीच आने वाले समय में जांच किस दिशा में जाती है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।














