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ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत की मौजूदगी, सदस्यता से फिलहाल दूरी…ऑब्जर्वर बनकर रखी नजर

डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने ऑब्जर्वर के रूप में हिस्सा लिया। सदस्यता पर अभी फैसला बाकी है, लेकिन नई दिल्ली इस मंच की गतिविधियों और वैश्विक प्रभाव पर करीबी नजर बनाए हुए है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 20 Feb 2026 8:16:18

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत की मौजूदगी, सदस्यता से फिलहाल दूरी…ऑब्जर्वर बनकर रखी नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली आधिकारिक बैठक में भारत ने गुरुवार (19 फरवरी) को बतौर ऑब्जर्वर हिस्सा लिया। सदस्यता पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है, लेकिन नई दिल्ली ने संकेत दे दिए हैं कि वह इस मंच की गतिविधियों पर करीब से नजर रखे हुए है। वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में तैनात भारत के चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने इस बैठक में देश का प्रतिनिधित्व किया।

संयुक्त राष्ट्र के विकल्प की कोशिश?

पिछले महीने विश्व आर्थिक मंच के दावोस सम्मेलन में ट्रंप ने इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की परिकल्पना सार्वजनिक रूप से रखी थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मंच भविष्य में संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं को चुनौती दे सकता है। शुरुआत में इसे गाजा में इजरायल और हमास के बीच संघर्षविराम की निगरानी और संभावित प्रशासनिक भूमिका निभाने वाली संस्था के तौर पर पेश किया गया था। हालांकि, समय बीतने के साथ इस बोर्ड की भूमिका और महत्वाकांक्षाएं कहीं अधिक व्यापक नजर आने लगी हैं।

किन देशों ने लिया हिस्सा?

वॉशिंगटन स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित इस बैठक में करीब 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें से 27 देश औपचारिक सदस्य के रूप में जुड़े हैं। सदस्य देशों की सूची में अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ समेत कुछ अन्य देशों ने फिलहाल पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई।

भारत की रणनीतिक सतर्कता

भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिलने के बाद नई दिल्ली ने तुरंत कोई औपचारिक घोषणा नहीं की थी। दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम से भी भारत ने दूरी बनाए रखी। 12 फरवरी को विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि अमेरिका की ओर से आमंत्रण मिला है और सरकार इसकी समीक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी दोहराया था कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले हर रचनात्मक प्रयास का समर्थन करता है।

गुरुवार की बैठक में भारतीय प्रतिनिधि की मौजूदगी से यह संदेश गया है कि भारत इस मंच से पूरी तरह दूरी नहीं बनाना चाहता, लेकिन फिलहाल पूर्ण सदस्यता लेने के बजाय स्थिति का आकलन कर रहा है। यह रुख भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति के अनुरूप है, जिसमें वह वैश्विक पहलों में संतुलित और सावधानीपूर्ण भागीदारी को प्राथमिकता देता है।

पहली बैठक में क्या घोषणाएं हुईं?

बैठक के दौरान ट्रंप ने बताया कि नौ सदस्य देशों—कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत—ने गाजा के लिए 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति जताई है। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका स्वयं इस शांति बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर का योगदान देगा। हालांकि, इस राशि का उपयोग किन परियोजनाओं या व्यवस्थाओं में किया जाएगा, इस पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

पहली बैठक के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि एक ऐसे मंच के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है जो वैश्विक शक्ति संतुलन और कूटनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। ऐसे में भारत का ऑब्जर्वर के रूप में शामिल होना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली इस उभरते भू-राजनीतिक मंच की दिशा और प्रभाव को समझने के बाद ही अगला कदम उठाना चाहती है।

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