
क्या आपने कभी लंच के बाद अचानक सुस्ती, ध्यान केंद्रित न कर पाने या दिमाग भारी महसूस होने जैसी समस्या महसूस की है? इसे आमतौर पर “ब्रेन फॉग” कहा जाता है। ब्रेन फॉग का मतलब है दिमाग में धुंधलापन, काम में मन न लगना और थकान महसूस होना। कई लोग इसे सामान्य मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे खानपान और जीवनशैली से जुड़े कारण छिपे होते हैं। यदि आप भी लंच के बाद ब्रेन फॉग का सामना करते हैं, तो इसे समझना और समय रहते रोकथाम करना बेहद जरूरी है।
लंच के बाद ब्रेन फॉग क्यों होता है?
भारी भोजन: दोपहर के समय तैलीय, मसालेदार या ज्यादा मात्रा में भोजन करने से शरीर को उसे पचाने में अधिक ऊर्जा लगती है। इससे दिमाग तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और थकान महसूस होती है।
मीठा और कार्बोहाइड्रेट: लंच में अधिक मीठा या कार्बोहाइड्रेट लेने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है। इस उतार-चढ़ाव के कारण दिमाग थक जाता है।
डिहाइड्रेशन: पानी की कमी से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घट जाती है और ब्रेन फॉग बढ़ता है।
नींद की कमी: रात को पूरी नींद न लेने पर लंच के बाद शरीर और दिमाग दोनों भारीपन महसूस करते हैं।
ब्रेन फॉग के लक्षण
- अचानक थकान और सुस्ती महसूस होना
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- काम में बार-बार रुकावट आना
- सिर भारी लगना
- आलस्य और चिड़चिड़ापन बढ़ना
ब्रेन फॉग से बचने के आसान उपाय
- दोपहर के भोजन में सब्ज़ियां, दाल, साबुत अनाज और सलाद शामिल करें। तैलीय और तला-भुना भोजन कम करें।
- लंच में मीठे पेय, मिठाई या अधिक सफेद चावल से बचें। इसके बजाय दही, छाछ या मौसमी फल लें।
- भोजन से पहले और बाद में पर्याप्त पानी पिएं। यह डिहाइड्रेशन को रोकता है और दिमाग एक्टिव रहता है।
- भोजन के तुरंत बाद लेटने की बजाय 5 मिनट हल्की वॉक करें। इससे पाचन बेहतर होता है और दिमाग तरोताजा रहता है।
- रात में कम से कम 8 घंटे की नींद लें। नींद पूरी होने से दिन में सुस्ती और ब्रेन फॉग की समस्या कम होती है।
- काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें, गहरी सांस लें और हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे दिमाग को ऑक्सीजन मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














