
अगर आप लंच के बाद किसी दक्षिण कोरियाई दफ्तर में झांकें, तो आपको एक दिलचस्प नजारा देखने को मिलेगा—हर कोई अपने टूथब्रश और मिंट टूथपेस्ट लेकर वॉशरूम की ओर जा रहा होता है। यह किसी विज्ञापन की शूटिंग नहीं, बल्कि वहां के लोगों की रोजमर्रा की आदत है।
जहां दुनिया भर में ज्यादातर लोग सुबह और रात में दो बार ब्रश करते हैं, वहीं दक्षिण कोरिया में यह नियम थोड़ा अलग है। यहां लोग दिन में तीन बार दांत साफ करते हैं। यहां ब्रश करना सिर्फ पर्सनल हाइजीन नहीं, बल्कि सामाजिक शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता है। कोरियाई मान्यता के अनुसार, साफ-सुथरी मुस्कान आत्म-अनुशासन, सभ्यता और आत्म-सम्मान की पहचान है।
क्या है ‘ट्रिपल थ्री फॉर्मूला’?
कोरिया में दांत साफ करना एक तरह का सार्वजनिक संस्कार बन चुका है, जिसे “ट्रिपल थ्री फॉर्मूला” कहा जाता है। इस फॉर्मूले के तीन मूल नियम हैं— दिन में तीन बार ब्रश करना, हर भोजन के तीन मिनट के भीतर, और पूरे तीन मिनट तक ब्रश करना।
यह फॉर्मूला न केवल दांतों को मजबूत और साफ रखता है, बल्कि माउथ ओडर यानी सांसों की दुर्गंध जैसी आम समस्या से भी बचाता है।
बचपन से सिखाई जाती है ब्रशिंग की आदत
कोरियाई समाज में यह आदत बचपन से ही बच्चों में डाली जाती है। किंडरगार्डन और डे-केयर सेंटर में बच्चे समूह में ब्रश करना सीखते हैं। शिक्षकों द्वारा उन्हें सही ब्रशिंग तकनीक, समय और अनुशासन का महत्व समझाया जाता है।
स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष ब्रशिंग जोन बनाए जाते हैं—लंबे सिंक, कई नल और स्टोरेज रैक के साथ। यहां यह सिर्फ ब्रशिंग एक्टिविटी नहीं होती, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रशिक्षण भी होता है।
ऑफिस से लेकर मॉल तक—हर जगह दिखती है यह संस्कृति
कोरिया में यह प्रथा सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रही। अब यह कार्यस्थलों, मॉल, कैफे, बस स्टेशनों और रेलवे प्लेटफॉर्म तक फैल चुकी है। वहां के वॉशरूम्स में ब्रश करने के लिए अलग सिंक और सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, ताकि लोग लंच या स्नैक्स के बाद आसानी से दांत साफ कर सकें।
कोरियाई लोगों के लिए ब्रशिंग ब्रेक अब उतना ही जरूरी है जितना कॉफी ब्रेक लेना। उनके लिए यह शरीर और मन दोनों को तरोताजा करने का जरिया बन गया है।
कैसे शुरू हुआ यह ब्रशिंग कल्चर?
इस अनोखी आदत की जड़ें 1980 के दशक में मिलती हैं। उस वक्त कोरियन डेंटल एसोसिएशन ने एक बड़े स्तर पर ओरल हेल्थ कैंपेन चलाया था।
इस अभियान का उद्देश्य था—लोगों को दांतों की सफाई के प्रति जागरूक बनाना। क्योंकि कोरियाई भोजन में लहसुन का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है, जिससे सांसों में दुर्गंध की समस्या आम थी। दंत चिकित्सकों ने इसका समाधान “दिन में तीन बार ब्रश” के रूप में सुझाया। धीरे-धीरे यह नियम समाज में गहराई से उतर गया और अब यह कोरियाई जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन गया है।
क्यों अपनाया गया ट्रिपल थ्री फॉर्मूला?
इस आदत का मकसद सिर्फ स्वस्थ दांत पाना नहीं, बल्कि सामाजिक आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। जब किसी की मुस्कान साफ और सांसें ताजी हों, तो संवाद करना सहज और सुखद लगता है।
यही वजह है कि दक्षिण कोरिया में ब्रश करना केवल हाइजीन हैबिट नहीं रहा, बल्कि अब यह एक संस्कृतिक पहचान और जीवन अनुशासन का प्रतीक बन चुका है।














