
फिल्म और टीवी जगत से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है — दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे सतीश शाह ने शुक्रवार, 25 अक्टूबर को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। मिली जानकारी के अनुसार, बीते कुछ महीनों से वे लगातार अस्वस्थ थे और किडनी फेलियर के चलते उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। सतीश शाह का करियर चार दशक से भी अधिक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने सिनेमा और टेलीविजन दोनों में अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से, ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ में इंद्रवदन साराभाई के किरदार से वे हर घर का जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे।
किडनी फेलियर बना सतीश शाह के निधन का कारण
गुजरात में जन्मे और मुंबई में पले-बढ़े सतीश शाह अपनी कॉमिक टाइमिंग, सरल स्वभाव और शानदार अभिनय के लिए जाने जाते थे। जानकारी के मुताबिक, वे किडनी फेलियर से पीड़ित थे — यह वह अवस्था होती है जब किडनी धीरे-धीरे अपना काम करना बंद कर देती है और शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर नहीं निकाल पाती। इस स्थिति में मरीज को थकान, सूजन, सांस लेने में परेशानी, भूख में कमी और ब्लड प्रेशर असंतुलन जैसी दिक्कतें होती हैं।
किन लक्षणों से पहचानें किडनी की बीमारी?
डॉक्टरों के अनुसार, किडनी की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके शुरुआती संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर पेशाब की मात्रा में बदलाव (कम या अधिक आना), चेहरे या पैरों में सूजन, आंखों के नीचे फुलाव, लगातार थकान, कमजोरी या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा, भूख न लगना, उल्टी आना या नींद न पूरी होना भी किडनी के बिगड़ते स्वास्थ्य के संकेत हो सकते हैं। समय पर इन लक्षणों की जांच और इलाज से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
चौथे चरण में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक, सतीश शाह की बीमारी स्टेज 4 क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में पहुंच चुकी थी। इस अवस्था में किडनी की 75 से 85 प्रतिशत कार्यक्षमता खत्म हो जाती है। किडनी शरीर के लिए बेहद जरूरी अंग है — यह खून को शुद्ध करती है, तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखती है, हार्मोन नियंत्रित करती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। जब यह सही से काम नहीं करती, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे हृदय रोग, एनीमिया, हड्डियों की कमजोरी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
इलाज और सावधानियां
जब किडनी की बीमारी स्टेज 4 तक पहुंच जाती है, तो उसका इलाज जटिल हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर मरीज को ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने, नमक, प्रोटीन और फॉस्फोरस की मात्रा सीमित करने की सलाह देते हैं। अगर किडनी की कार्यक्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए, तो मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।














