
अकसर लोग नई फिटनेस जर्नी जोश के साथ शुरू करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में थकावट और बोरियत के कारण उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। खासकर तब, जब जिम या होम वर्कआउट रूटीन रोज़ाना एक जैसा लगने लगे। लेकिन अब इस थकान और बोरियत से छुटकारा पाने का एक आसान और वैज्ञानिक तरीका सामने आया है, जिसे कहा जाता है ‘पीक एंड रूल (Peak-End Rule)’। यह एक साइकोलॉजी पर आधारित सिद्धांत है, जो आपके वर्कआउट अनुभव को न सिर्फ मजेदार बनाता है बल्कि आपको मोटिवेट भी रखता है।
‘पीक एंड रूल’ क्या है?
‘पीक एंड रूल’ एक मानसिक मॉडल है, जिसके अनुसार कोई भी अनुभव हमें कितना अच्छा या बुरा लगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस अनुभव का सबसे ऊँचा (peak) और आखिरी हिस्सा (end) कैसा रहा। सरल शब्दों में, अगर आपका वर्कआउट का सबसे मजेदार पल और अंतिम कुछ मिनट पॉजिटिव रहे, तो पूरे सेशन को आप अच्छा अनुभव मानेंगे, भले ही बीच के समय में थकान या कठिनाई रही हो।
वर्कआउट में इसे कैसे अपनाएं?
1. पीक मोमेंट बनाएं : वर्कआउट के बीच में अपने पसंदीदा और एनर्जेटिक एक्सरसाइज को रखें। जैसे कि पसंदीदा गाने पर कार्डियो, हाई-इंटेंसिटी मूव्स या कोई ऐसा एक्सरसाइज जिसे करना आपको सबसे ज्यादा पसंद हो।
2. पॉजिटिव एंडिंग : सेशन के आखिरी मिनट को रिलैक्सिंग और सुकून भरा बनाएं। स्ट्रेचिंग, डीप ब्रीदिंग या शांत म्यूजिक के साथ कूल डाउन करें। यह आपके दिमाग में पॉजिटिव फीलिंग छोड़ता है और पूरे वर्कआउट को यादगार बनाता है।
3. रिवार्ड या सेल्फी : वर्कआउट के बाद खुद को छोटा सा रिवार्ड दें। मिरर में अपनी फोटो लेना, वर्कआउट का छोटा नोट लिखना या किसी दोस्त को बताना कि आपने सेशन पूरा कर लिया, ये सब आपके अनुभव को और भी सकारात्मक बनाते हैं।
फायदे जो आपको मिलेंगे
- वर्कआउट के प्रति बोरियत कम होगी और मोटिवेशन बढ़ेगा।
- हर सेशन के बाद पॉजिटिव फीलिंग बनेगी।
- एक्सरसाइज को छोड़ने का मन नहीं करेगा।
- आपका मस्तिष्क पूरे वर्कआउट को एक अच्छा अनुभव मानकर भविष्य में सेशन करने के लिए प्रेरित होगा।
एक्सपर्ट का नजरिया
क्रिसटॉफ़र बर्गलैंड, रिटायर्ड अल्ट्रा‑एंड्यूरेंस एथलीट और साइंस राइटर, बताते हैं कि “Peak–End Rule” अपनाने से वर्कआउट न केवल यादगार बनता है, बल्कि इसे जारी रखने की इच्छा भी बढ़ती है। उनका कहना है कि वर्कआउट का सबसे ऊँचा पल और सुखद अंत ही हमारे दिमाग में पूरे सेशन की स्मृति को पॉजिटिव बनाता है। भले ही बीच के सेशन कठिन हों, अगर आप इसे मज़ेदार और पॉजिटिव बनाने पर ध्यान दें, तो हर एक्सरसाइज का अनुभव बेहतर और प्रेरक बन जाएगा।
वर्कआउट अब केवल शारीरिक नहीं, मानसिक भी
फिटनेस केवल बॉडी को मजबूत बनाने के लिए नहीं होती, बल्कि दिमाग और मानसिक ऊर्जा के लिए भी जरूरी है। ‘पीक एंड रूल’ को अपनाकर आप एक्सरसाइज को थकान देने वाली गतिविधि के बजाय ऊर्जा, खुशी और मोटिवेशन का स्रोत बना सकते हैं। अगली बार जब आप जिम जाएं या घर पर वर्कआउट करें, तो इस फॉर्मूले को आज़माएँ और अंतर खुद महसूस करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














