
नवरात्रि के पावन अवसर पर व्रत रखने वाले अक्सर यही सवाल करते हैं कि व्रत में ऐसा क्या खाया जाए जो सेहत के लिए फायदेमंद भी हो और धार्मिक नियमों का पालन भी हो। इस समय कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना सबसे लोकप्रिय विकल्प बन जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कौन सा विकल्प आपके स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है?
कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है और प्रोटीन तथा फाइबर से भरपूर माना जाता है। इसमें मैग्नीशियम, मैंगनीज और फॉस्फोरस जैसे खनिज भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में सहायक हैं। व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से पूरी, परांठा, या पकौड़े बनाकर आसानी से खाया जा सकता है।
सिंघाड़े का आटा
सिंघाड़े का आटा भी ग्लूटेन-फ्री है और इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गुण मौजूद होते हैं। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। व्रत में सिंघाड़े का हलवा, पूरी या पकौड़े स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होते हैं।
साबूदाना
साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इसमें कैल्शियम, आयरन और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स मौजूद होते हैं, जो पाचन और मांसपेशियों की मजबूती के लिए लाभकारी हैं। साबूदाना खिचड़ी, वड़ा या खीर व्रत के दौरान लोकप्रिय विकल्प हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें जल्दी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
सेहत के लिहाज से सबसे अच्छा विकल्प कौन सा?
इन तीनों विकल्पों में सबसे अच्छा कौन है, यह आपकी स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों पर निर्भर करता है। अगर आपका लक्ष्य वजन नियंत्रित करना है तो कुट्टू का आटा सबसे बेहतर है क्योंकि इसमें कम कैलोरी और अधिक प्रोटीन होता है। तुरंत ऊर्जा चाहिए तो साबूदाना सही विकल्प है। वहीं, सिंघाड़े का आटा एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।














