बोतल बंद पानी की गुणवत्ता को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। FSSAI ने हाल ही में बोतल बंद पानी को ‘उच्च जोखिम वाले खाद्य पदार्थ’ की श्रेणी में शामिल किया है। इसका मतलब है कि अब इस पानी के निर्माताओं को साल में कम से कम एक बार इसकी जांच करवाना अनिवार्य होगा। पिज्जा, बर्गर और मोमोज जैसे फास्ट फूड को पहले से ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता रहा है, लेकिन अब बोतल बंद पानी में मिलावट और उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
‘उच्च जोखिम’ श्रेणी में आने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया की सख्त निगरानी की जाती है। ऐसे खाद्य पदार्थों में मिलावट का खतरा अधिक होता है और इसलिए उनकी सालाना जांच आवश्यक होती है। 27 नवंबर 2024 को जारी अधिसूचना के तहत, बोतल बंद पानी और मिनरल वाटर को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणन की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, अब इनके निर्माण और उत्पादन प्रक्रिया की जांच तीसरे पक्ष द्वारा की जाएगी ताकि उत्पादों की स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
अगर कोई उत्पादक जांच में 80% से अधिक स्कोर करता है या 5-स्टार स्वच्छता रेटिंग हासिल करता है, तो उसे एक साल की जांच से छूट दी जा सकती है। यह प्रक्रिया डेयरी उत्पादों, मांस, मछली, अंडा और भारतीय मिठाइयों जैसे अन्य उच्च जोखिम वाले खाद्य पदार्थों के लिए भी लागू होती है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए FSSAI और राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण पूरे वर्ष निरीक्षण करते हैं। यह निरीक्षण आमतौर पर लाइसेंस जारी करने से पहले या किसी समस्या की सूचना मिलने पर किया जाता है।
इस नए आदेश के बाद बोतल बंद पानी के निर्माताओं पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध पानी मिल सके। उपभोक्ताओं को भी सलाह दी जाती है कि वे उत्पाद खरीदते समय निर्माण तिथि और गुणवत्ता प्रमाणन की जांच जरूर करें। यह कदम न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा बल्कि उत्पादकों को भी बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।