
विपक्षी INDIA अलायंस ने उपराष्ट्रपति चुनाव के अपने उम्मीदवार के चयन के लिए आज शाम अहम बैठक बुलाई है। शुरुआती खबरों के अनुसार तमिलनाडु के सांसद तिरुचि सिवा के नाम पर मुहर लग सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भाजपा ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित कर तमिलनाडु कार्ड खेला, जिससे राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की दिशा और रणनीति प्रभावित हो सकती है। भाजपा के इस फैसले से डीएमके, एआईएडीएमके और कांग्रेस को राजनीतिक रूप से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषकर यदि डीएमके ने समर्थन नहीं दिया तो तमिल नेता को उम्मीदवार बनाने के खिलाफ विपक्षी रणनीति अपनाई जा सकती है। वहीं एआईएडीएमके के पास भी अब कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं रहेगा, जिससे विपक्षी दलों को अपने कदम सोच-समझकर रखने होंगे।
कांग्रेस की मजबूरी और रणनीति
कांग्रेस की चुनौती यह है कि तमिलनाडु से आने वाले उम्मीदवार को समर्थन देकर डीएमके को संतुलित किया जाए, ताकि राज्य में कोई असंतोष पैदा न हो। इसी कारण तिरुचि सिवा को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। एनडीए की ओर से सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा के बाद चर्चा यह रही कि विपक्ष बिहार से किसी नेता को आगे ला सकता है या फिर तमिलनाडु के किसी प्रभावशाली नेता पर दांव खेल सकता है।
डीएमके की मांग थी कि विपक्षी अलायंस तमिलनाडु से किसी नेता को उम्मीदवार बनाए, और इसी पर कांग्रेस ने सहमति जताई।
तिरुचि सिवा का महत्व
तिरुचि सिवा इस लिहाज से उपयुक्त हैं कि वे तमिलनाडु के डीएमके के राज्यसभा सांसद हैं। भले ही विपक्ष के पास जीत के लिहाज से पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन उनके नाम पर तमिल अस्मिता और राज्य का संदेश देने की कोशिश की जाएगी। वहीं, सरकार की ओर से सीपी राधाकृष्णन को लेकर सहमति बनाने की कवायद जारी है। संभावना है कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों से संपर्क साधकर उन्हें राधाकृष्णन का समर्थन करने के लिए प्रेरित कर सकती है, ताकि चुनाव की प्रक्रिया टल सके।
इस रणनीति से विपक्ष और सरकार दोनों ही अगले साल के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिहाज से राजनीतिक संदेश देने और स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं।














