
नई दिल्ली । चीन के विदेश मंत्री वांग यी सोमवार से अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान उनका कार्यक्रम विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताओं का है।
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, वांग यी का यह दौरा कई मायनों में अहम है। हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और रूस से तेल खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्कों के बीच, भारत और चीन अपने द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।
सीमा मुद्दों पर विशेष वार्ता
विदेश मंत्रालय ने बताया कि वांग यी मुख्य रूप से सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (SR) की वार्ता के लिए भारत आए हैं। अजीत डोभाल और वांग यी, दोनों ही देशों की ओर से विशेष प्रतिनिधि हैं।
सोमवार शाम लगभग 4:15 बजे वांग यी नई दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद शाम 6 बजे उनकी जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। मंगलवार सुबह 11 बजे वह एनएसए डोभाल के साथ एसआर स्तर की वार्ता का नया दौर शुरू करेंगे।
प्रमुख एजेंडा
बैठकों में सीमा की मौजूदा स्थिति, व्यापार संबंध, और हवाई सेवाओं की बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी मंगलवार शाम 5:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात करेंगे।
गलवान झड़प के बाद संबंध सुधार की कोशिश
यह यात्रा इसलिए और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते गहरे तनाव में चले गए थे। अभी भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं। हालांकि कई टकराव वाले इलाकों से सैनिक हटाए गए हैं, लेकिन अग्रिम मोर्चों पर फोर्स की मौजूदगी बनी हुई है।
पीएम मोदी की आगामी यात्रा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के तियानजिन जाएंगे। इससे पहले वांग यी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
पिछले साल दिसंबर में अजीत डोभाल ने भी चीन जाकर विशेष प्रतिनिधि वार्ता में हिस्सा लिया था। वहीं, कुछ सप्ताह पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कजान शहर में मुलाकात कर रिश्तों को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।














