
आज की डिजिटल दुनिया में ईयरफोन हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। चाहे ऑफिस में मीटिंग हो, कॉलेज लेक्चर, सफर के दौरान म्यूज़िक या फिर जिम में वर्कआउट—हर जगह ईयरफोन का इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका लगातार उपयोग आपकी सुनने की शक्ति को कमजोर कर सकता है? धीरे-धीरे कानों पर दबाव बढ़ने लगता है और कई बार यह स्थिति स्थायी सुनने की समस्या में भी बदल सकती है।
कानों पर लगातार दबाव क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों का कहना है कि ईयरफोन से निकलने वाली आवाज़ सीधे कान की नसों पर असर डालती है। अगर लंबे समय तक हाई वॉल्यूम पर म्यूज़िक या वीडियो सुने जाएं, तो शुरुआत में हल्की सुनने की समस्या दिखती है। धीरे-धीरे यह परेशानी बढ़कर श्रवण क्षमता में कमी (Hearing Loss) तक ले जा सकती है।
ऊँची आवाज़ वाले ईयरफोन का बढ़ता चलन
आजकल लोग ऐसे ईयरफोन चुनते हैं जिनमें आवाज़ बेहद तेज़ और दमदार हो। अक्सर लोग बाहर के शोर को दबाने के लिए वॉल्यूम इतना बढ़ा देते हैं कि कानों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है। यह आदत धीरे-धीरे कानों की संवेदनशील कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और आगे चलकर गंभीर परिणाम सामने ला सकती है।
# लगातार ईयरफोन पहनने से होने वाले नुकसान
ईयरफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल सिर्फ सुनने की क्षमता ही नहीं, बल्कि कान और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। आइए विस्तार से समझते हैं:
1. कान में संक्रमण (Ear Infection)
लगातार ईयरफोन पहनने से कान के भीतर हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे नमी और बैक्टीरिया कान के अंदर जमा हो सकते हैं, जो संक्रमण का कारण बनते हैं। इसके लक्षणों में दर्द, खुजली, सूजन और कभी-कभी कान से तरल पदार्थ का निकलना शामिल है।
2. Ear Wax (मोम) की समस्या
हमारे कान स्वाभाविक रूप से Ear Wax बनाते हैं, जो धूल और बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकता है। लेकिन ईयरफोन लंबे समय तक कान में रहने से Ear Wax बाहर नहीं निकल पाता और जमने लगता है। यह ब्लॉकेज पैदा कर सकता है, जिससे सुनने में भारीपन या दर्द महसूस होने लगता है।
3. स्थायी सुनने की क्षमता में कमी (Hearing Loss)
लगातार हाई वॉल्यूम पर संगीत सुनना कान की नाज़ुक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। एक बार ये कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वे दोबारा नहीं बनतीं। इसका नतीजा धीरे-धीरे Hearing Loss या बहरापन हो सकता है।
4. कान में घंटी बजने की समस्या (Tinnitus)
ईयरफोन का दुरुपयोग करने वालों में Tinnitus यानी कान में लगातार सीटी या घंटी बजने जैसी आवाज़ें सुनाई देना आम हो जाता है। यह लक्षण संकेत देता है कि आपके कान पर वॉल्यूम का दबाव बढ़ चुका है।
5. चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना
कान सिर्फ सुनने का काम नहीं करता बल्कि शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। जब कान की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, तो चक्कर आना, सिर भारी लगना और संतुलन बिगड़ना जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
6. मानसिक तनाव और थकान
उच्च आवाज़ में लंबे समय तक संगीत सुनने से सिर्फ कान ही नहीं बल्कि मस्तिष्क भी प्रभावित होता है। तेज आवाज़ से दिमाग पर दबाव पड़ता है, जिससे सिरदर्द, तनाव और थकान महसूस होती है।
7. सामाजिक जीवन पर असर
जब व्यक्ति धीरे-धीरे सुनने में कठिनाई अनुभव करने लगता है, तो वह बातचीत से बचने लगता है। इससे रिश्तों में दूरी आ सकती है और आत्मविश्वास भी कम हो सकता है।
# श्रवण क्षमता की सुरक्षा कैसे करें?
हमारी सुनने की क्षमता बेहद संवेदनशील होती है, और इसकी सही देखभाल करना ज़रूरी है। ईयरफोन का इस्तेमाल पूरी तरह से छोड़ना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर आप अपनी Hearing Health सुरक्षित रख सकते हैं।
वॉल्यूम नियंत्रण
हमेशा ध्यान रखें कि ईयरफोन का वॉल्यूम 60% से ज़्यादा न हो। बहुत तेज़ आवाज़ कान की नसों पर दबाव डालती है और धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचाती है।
आराम के अंतराल लें
हर 1-2 घंटे में ईयरफोन निकालकर कानों को ब्रेक दें। इससे नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और कानों को रिलैक्स करने का समय मिलता है।
साफ-सफाई पर ध्यान दें
ईयरफोन को नियमित रूप से साफ करें और कानों की स्वच्छता का भी ख्याल रखें। गंदगी और बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
नॉइज़ कैंसिलिंग ईयरफोन का उपयोग
Noise Cancelling ईयरफोन का फायदा यह है कि ये बाहरी शोर को कम कर देते हैं। इससे आपको आवाज़ तेज़ करने की ज़रूरत नहीं पड़ती और कान सुरक्षित रहते हैं।
समय की सीमा तय करें
ईयरफोन का इस्तेमाल दिनभर न करें। कोशिश करें कि अधिकतम 3-4 घंटे ही ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
नींद के दौरान ईयरफोन न लगाएँ
कई लोग आदत में सोते समय भी म्यूज़िक सुनते रहते हैं। यह कान और दिमाग दोनों के लिए हानिकारक है।
# सुनने की क्षमता घटने के शुरुआती संकेत
सुनने की समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद ज़रूरी है, ताकि समय रहते इलाज किया जा सके।
- अक्सर लोगों से कहना पड़ना—“फिर से बोलो, मैंने सुना नहीं।”
- टीवी, मोबाइल या रेडियो की आवाज़ दूसरों से ज़्यादा तेज़ करनी पड़ना।
- वॉल्यूम कम करने पर शब्दों को साफ़-साफ़ न सुन पाना।
- बातचीत के दौरान बार-बार शब्द छूट जाना या गड़बड़ सुनाई देना।
- बैकग्राउंड शोर (Background Noise) में लोगों की आवाज़ न पहचान पाना।
- कानों में लगातार घंटी या सीटी बजने जैसी आवाज़ आना (Tinnitus)।
ईयरफोन हमारी ज़िंदगी को आसान और मनोरंजक तो बनाते हैं, लेकिन इनके अत्यधिक और गलत उपयोग से आपकी सुनने की शक्ति को गंभीर नुकसान हो सकता है। सही आदतें अपनाकर और थोड़ी सावधानी बरतकर आप लंबे समय तक अपने कानों की सेहत सुरक्षित रख सकते हैं। याद रखें—मनोरंजन का असली मज़ा तभी है, जब कान स्वस्थ हों और आवाज़ें साफ़ सुनाई दें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














