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अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट की तबीयत बिगड़ने पर क्या होता है? जानें इलाज की पूरी प्रक्रिया और इमरजेंसी रिटर्न की हकीकत

अगर अंतरिक्ष में किसी एस्ट्रोनॉट की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो क्या होता है? क्या वहीं इलाज संभव होता है या उसे इमरजेंसी में धरती पर लाया जाता है? जानें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मेडिकल सुविधा और इमरजेंसी रिटर्न की पूरी प्रक्रिया।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Fri, 27 June 2025 08:54:39

अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट की तबीयत बिगड़ने पर क्या होता है? जानें इलाज की पूरी प्रक्रिया और इमरजेंसी रिटर्न की हकीकत

अंतरिक्ष — एक ऐसा रहस्यमय संसार जिसे इंसान दशकों से समझने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हर कदम पर नई चुनौतियाँ सामने आती हैं। वैज्ञानिकों ने इसकी गहराईयों को जानने के लिए कई सफलताएं हासिल की हैं, लेकिन वहां मौजूद खतरे और परिस्थितियाँ आज भी जटिल बनी हुई हैं।

बीते दिनों शुभांशु शुक्ला समेत चार अंतरिक्ष यात्री अपने महत्वपूर्ण मिशन के लिए स्पेस में गए। इस दौरान एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा को लेकर हर संभव तैयारी की जाती है — तकनीक, ट्रेनिंग और हेल्थ से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़ का ध्यान रखा जाता है।

लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर कोई अंतरिक्ष यात्री अचानक बीमार पड़ जाए, तब क्या किया जाता है? क्या वहीं इलाज संभव है या फिर इमरजेंसी में धरती पर वापस लाया जाता है? चलिए, इस रोमांचक विषय को विस्तार से समझते हैं।

क्या अंतरिक्ष में दवाएं होती हैं?

अंतरिक्ष का वातावरण हमारे धरती जैसे नहीं होता। वहाँ गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण एस्ट्रोनॉट्स के शरीर पर गहरा असर पड़ता है — हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी, प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट और अन्य स्वास्थ्य जोखिम आम हैं।

इसलिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक मेडिकल किट हमेशा मौजूद रहती है, जिसमें बुखार, उल्टी, सिरदर्द, दर्द निवारक, सेडेटिव्स, बीपी व शुगर चेक करने की मशीनें, और एंटीबायोटिक्स जैसी दवाएं शामिल होती हैं। इस किट को खास तौर पर अंतरिक्ष की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, ताकि किसी भी सामान्य से लेकर थोड़ी गंभीर स्थिति तक तुरंत राहत दी जा सके।

हर क्रू मेंबर को मिलती है हेल्थ इमरजेंसी की ट्रेनिंग

स्पेस मिशन पर जाने से पहले हर क्रू मेंबर को बेसिक मेडिकल ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) जैसी ज़रूरी स्किल्स शामिल होती हैं।

टीम में एक सदस्य को विशेष रूप से ट्रेन किया जाता है, जिसे स्पेस का मेडिकल ऑफिसर कहा जा सकता है। उसकी ज़िम्मेदारी होती है, अगर कोई साथी बीमार पड़ जाए तो वह तत्काल प्राथमिक उपचार दे सके। यह मेडिकल ऑफिसर अधिक विस्तृत प्रशिक्षण लेकर आता है, ताकि छोटी-बड़ी मेडिकल इमरजेंसी को वहीं पर संभाला जा सके।

इतना ही नहीं, धरती पर मौजूद डॉक्टरों की एक टीम 24x7 स्पेस स्टेशन से जुड़े रहती है और लाइव कनेक्शन के ज़रिए हर जरूरत के वक्त मार्गदर्शन करती है।

क्या अंतरिक्ष से धरती पर वापस भेजा जाता है?

सबसे अहम बात यह है कि स्पेस में सिर्फ उन्हीं लोगों को भेजा जाता है जो पूरी तरह से फिट और हेल्थ टेस्ट पास कर चुके होते हैं। लेकिन अंतरिक्ष की अप्रत्याशित स्थिति में अगर कोई क्रू मेंबर गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए और खतरा बढ़ जाए, तो "कॉन्टिन्जेंसी रिटर्न" यानी आपातकालीन वापसी का विकल्प भी तैयार होता है।

स्पेस स्टेशन में हमेशा एक 'लाइफबोट' स्पेसक्राफ्ट डॉक किया होता है, जो किसी भी आपातकाल में एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित वापस धरती पर भेजने के लिए तैयार रहता है।

यानी अगर इलाज संभव नहीं हो पाता और जान पर बन आती है, तो उस स्थिति में उन्हें तुरंत वापस भेजने की व्यवस्था होती है। इस तरह अंतरिक्ष में हर स्थिति के लिए एक विस्तृत योजना होती है — ताकि इंसानियत की इस सबसे महत्वाकांक्षी यात्रा में कोई चूक न रह जाए।

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