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7 साल बाद ताहिरा कश्यप को फिर से हुआ ब्रेस्ट कैंसर, जानिए कितनी बार हमला कर सकती है ये बीमारी

ताहिरा कश्यप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि 7 साल बाद ब्रेस्ट कैंसर से फिर से जूझ रही हैं। इस पोस्ट में उन्होंने रेगुलर चेकअप की अहमियत को बताया और कैंसर के पुनरावृत्ति के बारे में जानकारी दी। इस लेख में हम जानेंगे कि ब्रेस्ट कैंसर कितने समय बाद फिर से हो सकता है और इसके पुनरावृत्ति की संभावना किस प्रकार होती है।

Posts by : Nupur Rawat | Updated on: Mon, 07 Apr 2025 3:48:05

7 साल बाद ताहिरा कश्यप को फिर से हुआ ब्रेस्ट कैंसर, जानिए कितनी बार हमला कर सकती है ये बीमारी

मशहूर लेखिका और फिल्म निर्माता ताहिरा कश्यप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया, जिससे उनके फैंस और फॉलोअर्स चौंक गए। ताहिरा के पोस्ट से यह स्पष्ट हो रहा है कि वह एक बार फिर ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं। अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर ताहिरा ने लिखा, “सात साल की तकलीफ और इरिटेशन या रेगुलर चेकअप की पावर, मैंने दूसरे ऑप्शन को चुना और लोगों को भी यही सलाह देती हूं कि रेगुलर मैमोग्राम्स करवाते रहें। मेरा राउंड-2 शुरू हो गया है।” इस पोस्ट से यह जाहिर हो रहा है कि सात साल बाद ताहिरा को फिर से कैंसर का सामना करना पड़ा है। इस लेख में हम जानेंगे कि ब्रेस्ट कैंसर के दोबारा होने की संभावना कितने समय में होती है और कितनी बार इसका खतरा बढ़ सकता है।

कितने दिन में दोबारा अटैक कर सकता है ब्रेस्ट कैंसर? - What is the average time for breast cancer recurrence?

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद यह फिर से हमला कर सकता है। कई शोधों से पता चला है कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के कुछ महीनों या सालों बाद यह फिर से सक्रिय हो सकता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति में जरूरी नहीं कि हो। कुछ लोगों को इलाज के पहले ही साल में कैंसर का पुनरावृत्ति हो सकती है, जबकि कुछ लोगों को कई सालों बाद फिर से कैंसर का सामना करना पड़ता है। यह भी जरूरी नहीं कि कैंसर उसी जगह पर वापस आए। कई बार कैंसर अपनी स्थिति बदल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी को पहली बार ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो भविष्य में इसका अटैक गले का कैंसर या अन्य अंगों में भी हो सकता है।

कितनी बार ब्रेस्ट कैंसर कर सकता है अटैक? - How many times can breast cancer attack a person

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद, कुछ मरीजों में यह बीमारी फिर से हो सकती है। इसका मतलब है कि इलाज के बाद कुछ समय के भीतर यह बीमारी दोबारा वापसी कर सकती है, और कभी-कभी यह पुनरावृत्ति कई बार हो सकती है। हालांकि, यह भी जरूरी नहीं है कि सभी मरीजों को ब्रेस्ट कैंसर एक बार फिर से हो। वर्तमान में, इस बारे में कोई निश्चित शोध उपलब्ध नहीं है कि एक व्यक्ति को कितनी बार ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह देखा गया है कि मरीज एक बार कैंसर का इलाज कराने के बाद भी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं और लंबा और स्वस्थ जीवन जीते हैं।

इसके अलावा, यह भी जरूरी नहीं कि ब्रेस्ट कैंसर फिर से उसी स्थान पर वापस आए। कभी-कभी कैंसर दूसरे अंगों या टिश्यूज में भी फैल सकता है। जैसे कि अगर किसी व्यक्ति को पहले ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो अगले कुछ वर्षों में यह गले, लिवर, फेफड़ों या हड्डियों में भी हो सकता है। इसलिए, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद नियमित चेकअप और मेडिकल टेस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यह मरीज को कैंसर के पुनरावृत्ति के संकेतों को जल्दी पहचानने में मदद करते हैं। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ब्रेस्ट कैंसर का इलाज अब पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो गया है। समय रहते इलाज और सही देखभाल से कई मरीज ब्रेस्ट कैंसर को पूरी तरह से मात दे सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं। हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर की पुनरावृत्ति के बारे में सतर्क रहना और नियमित जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।

कैसे करें ब्रेस्ट कैंसर की पहचान? - Symptoms of Breast Cancer

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण और पहचान के तरीके

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय रहते पहचान करने से इसका इलाज करना आसान हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर की पहचान आप शरीर में दिखाई देने वाले कुछ खास बदलावों से कर सकते हैं। निम्नलिखित लक्षण ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं:

ब्रेस्ट के आसपास गांठ जैसा महसूस होना : ब्रेस्ट में किसी भी प्रकार की गांठ का महसूस होना, जो पहले नहीं थी, ब्रेस्ट कैंसर का एक आम लक्षण हो सकता है। ये गांठ अक्सर कठोर और असममित होती है, और यह सामान्यत: बिना दर्द के होती है। यदि यह गांठ समय के साथ बढ़ने लगे या आकार में बदलने लगे, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।

निप्पल के रंग में बदलाव : निप्पल के रंग में असामान्य बदलाव आना भी एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। इसमें निप्पल का सिकुड़ना, गहरे रंग में बदलाव, या निप्पल से खून या पीप का निकलना शामिल हो सकता है।

ब्रेस्ट की त्वचा में गड्ढे, सिकुड़न, या लालिमा : ब्रेस्ट की त्वचा में गड्ढे, सिकुड़न, या लालिमा दिखाई देना भी ब्रेस्ट कैंसर के संकेत हो सकते हैं। यह स्थिति “ऑरेंज पील” जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है, जिसमें त्वचा की सतह पर खामियां या असमानताएं दिखाई देती हैं।

बगल के लिम्फ नोड्स में सूजन : बगल में लिम्फ नोड्स (अंडरआर्म्स) में सूजन आना भी ब्रेस्ट कैंसर का एक संकेत हो सकता है। यह सूजन तब होती है जब कैंसर कोशिकाएं लिम्फ नोड्स में फैल जाती हैं।

ब्रेस्ट के आसपास दर्द :
ब्रेस्ट के किसी भी हिस्से में अचानक दर्द होना, खासकर अगर यह दर्द लगातार बने रहे या तेज हो, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। हालांकि, यह दर्द कई अन्य कारणों से भी हो सकता है, लेकिन अगर यह सामान्य दर्द से अलग और अधिक महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

निप्पल का खून या मवाद से रिसना : निप्पल से अचानक खून या मवाद का रिसना ब्रेस्ट कैंसर का एक गंभीर लक्षण हो सकता है, खासकर यदि यह बिना किसी स्पष्ट कारण के हो। यह ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते हुए चरण का संकेत हो सकता है, जिसमें ट्यूमर निप्पल के पास पहुंचने लगता है।

ब्रेस्ट का आकार या आकार में बदलाव : यदि ब्रेस्ट का आकार अचानक बदल जाए, जैसे कि ब्रेस्ट छोटा हो जाए, असममित हो जाए, या किसी भी तरह से असमान दिखे, तो यह भी कैंसर का संकेत हो सकता है।

त्वचा पर धब्बे या घाव : ब्रेस्ट की त्वचा पर कोई नया घाव, धब्बा या दाग दिखाई देना, जो ठीक नहीं हो रहा हो, यह भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है। यह लक्षण कैंसर के बढ़ने और त्वचा में बदलाव का परिणाम हो सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है जल्दी पहचानना?

किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते इलाज करने से मरीज की जीवन रक्षा हो सकती है। नियमित रूप से आत्म-परीक्षण (सेल्फ-एक्सामिनेशन), डॉक्टर द्वारा चेक-अप और आवश्यक जांचें करवाना ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को जल्दी पहचानने में मदद कर सकता है। अगर आपको ब्रेस्ट कैंसर के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी स्थिति का सही मूल्यांकन करके जरूरी टेस्ट और उपचार की सलाह देंगे।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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